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चंबल नदी में पांच हजार नन्हें घड़ियाल कर रहे अठखेलियां, रोमांचित कर देंगी ये तस्वीरें

Tue, 18 Jun 2019 04:46 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाह (आगरा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाह (आगरा) Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 18 Jun 2019 04:46 PM IST
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number of gharials grew up in Chambal river
चंबल नदी में घड़ियाल और उसके बच्चे - फोटो : अमर उजाला
बाह के चंबल सेंक्चुरी क्षेत्र में इस साल हैचिंग के बाद पांच हजार नन्हें घड़ियालों की अठखेलियां शुरू हो गई हैं। नदी के छोटे मेहमानों को अठखेलियां करते देखना पर्यटकों को रोमांचित कर रहा है। वन्य जीव विभाग नन्हें घड़ियालों की सुरक्षा और स्वास्थ्य की निगरानी कर रहा है।
number of gharials grew up in Chambal river
चंबल नदी में अठखेलियां करता नन्हा घड़ियाल - फोटो : अमर उजाला
1979 में चंबल नदी को चंबल सेंक्चुरी घोषित करने के बाद यहां संकटग्रस्त घड़ियालों की संख्या 1876 हो चुकी है। इस साल हैचिंग के बाद चंबल सेंक्चुरी की बाह रेंज में 1202 और इटावा रेंज में 4141 घड़ियाल शिशुओं का जन्म हुआ है। बाह में मऊ, कैंजरा, कछियारा, नंदगवां, महुआशाला, इटावा में खेड़ा अजब सिंह, कसौआ में नेस्टिंग हुई, जिनमें 5343 नन्हें मेहमान चंबल नदी में अठखेलियां कर रहे हैं। घड़ियाल की पीठ पर बैठकर नन्हें मेहमानों की जलक्रीड़ा देखकर लोग रोमांचित हो उठते हैं।
number of gharials grew up in Chambal river
चंबल नदी में घड़ियाल और उसके बच्चे - फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रीय चंबल सेंक्चुरी प्रोजेक्ट के डीएफओ आनंद कुमार के मुताबिक घड़ियाल शिशुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर नजर रखी जा रही है। हालांकि, इनकी जीवित रहने की दर 10 से 15 फीसदी तक ही होती है। इटावा के रेंजर सर्वेश भदौरिया और बाह रेंजर अमित सिसौदिया ने बताया कि घड़ियाल शिशुओं की निगरानी के लिए टीमें लगाई गई हैं। 
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चंबल नदी में अठखेलियां करते नन्हें घड़ियाल - फोटो : अमर उजाला
घड़ियाल की नेस्टिंग के बाद अंडे हैचिंग के लिए पहले कुकरैल प्रजनन केंद्र लखनऊ ले जाए जाते थे। अब प्राकृतिक हैचिंग शुरू हुई है। यही वजह है कि शुरुआत के सालों में घड़ियालों की वंश वृद्धि धीमी थी। लेकिन नेस्टिंग, हैचिंग दोनों चंबल में होने से अब कुनबा बढ़ रहा है।   
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चंबल नदी में घड़ियाल और उसके बच्चे - फोटो : अमर उजाला
चंबल में मगरमच्छों की हैचिंग का काम भी शुरू हो गया है। इटावा और बाह रेंज में वन विभाग के अमले ने नेस्ट पर लगी जाली को हटा दी है। अब हैचिंग के लिए नेस्टों की निगरानी की जा रही है। इटावा के कसौआ और बाह के महुआशाला के पास एक-एक नेस्ट से मगरमच्छ की हैचिंग हुई है।
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