जोश, मेहनत और नवीन सोच के साथ मैनपुरी जिले के युवा सफलता का मुकाम हासिल कर रहे हैं। युवा प्रतिभाओं ने अपनी लगन से यह साबित कर दिया कि इरादा पक्का हो कुछ भी नामुमकिन नहीं है। कोई नौकरी छोड़कर फूलों की खेती कर रहा है तो कोई खेलकूद में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहा है। राष्ट्रीय युवा दिवस पर जानिए जिले के ऐसे ही कुछ युवाओं की कहानी....
राष्ट्रीय युवा दिवस: किसी ने नौकरी छोड़ फूलों की खेती को बनाया रोजगार, किसी ने खेल में बनाई पहचान
गांव छिवकरिया निवासी रवि पाल (31) ने मथुरा के सचदेवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से वर्ष 2011 में एमबीए की डिग्री हासिल कर 2013 में नौकरी शुरू कर दी। इसके बाद नोएडा में टाटा मोटर्स के बिजनेस एरिया मैनेजर बन गए। पचास हजार रुपये महीने की नौकरी करने के दौरान रवि एक दिन घूमते-घूमते कृषि विज्ञान केंद्र दिल्ली गए। वहां वैज्ञानिकों से मिले, तो कुछ अलग करने की ठज्ञनी। अपने गांव की माटी में ही खेती कर मुनाफा कमाने का गुर सीखा।
वैज्ञानिकों की सलाह पर रवि ने छिवकरिया गांव में फूलों की खेती करने का फैसला लिया। दिसंबर 2014 में उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और गांव लौट आए। परिवार की 20 बीघा जमीन में से पहली बार में उन्होंने दो बीघा में गेंदे के फूल की खेती की। पांच माह में 75 हजार रुपये की आमदनी हुई, तो हौसला बढ़ा। आज वह दो हेक्टेयर में गेंदा की खेती कर रहे हैं। वर्तमान में मैनपुरी, इटावा, फिरोजाबाद, एटा, ओरैया, फर्रुखाबाद, कन्नौज आदि जिलों के दो सौ से अधिक किसान परिवार उनसे जुड़े हैं।
गांव लोधीपुर निवासी 27 वर्षीय पारितोष को वर्ष 2017 में पहलीबार सुल्तानपुर में खेली गई यूपी स्टेट वॉलीबाल चैंपियनशिप में पारितोष को प्रतिभाग करने का मौका मिला। वर्ष 2018 में अयोध्या में खेली गई स्टेट चैंपियनशिप में भाग लिया। वर्ष 2019 में पारितोष को चेन्नई में आयोजित होने वाली नेशनल प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया। पारितोष का सपना है कि वह इंटरनेशनल वॉलीबॉल प्रतियोगिता में भी खेले। इसके लिए वह अपनी पढ़ाई के साथ पूरा ध्यान खेल पर दे रही है।
किशनी क्षेत्र के गांव दुम्हार निवासी 32 वर्षीय रवि प्रताप सिंह एमबीए कर दक्षिण अफ्रीका के गोवान शहर में 3.75 लाख के मासिक पैकेज पर नौकरी कर रहे हैं। वर्ष 2011 में नोएडा से एमबीए करने के बाद 2012 में रवि प्रताप ने मात्र 12 हजार के मासिक पैकेज पर गुरुग्राम की एक कंपनी में नौकरी की। वर्ष 2015 में रवि ने टाटा ग्रुप नोएडा में आठ लाख वार्षिक के पैकेज पर नौकरी की। वर्ष 2018 में उसने दक्षिण अफ्रीका के गोवान में 3.75 लाख मासिक पैकेज पर काम करना शुरू किया।