आगरा के ऐतिहासिक बटेश्वर पशु मेले में उम्दा नस्ल के घोडे़-घोड़ी लग्जरी गाड़ियों से भी महंगे हैं। फिरोजाबाद के सलेमपुर के बहादुर सिंह की 35 लाख की घोड़ी पूजा, नगला गुलाल के राम बहादुर की 40 लाख की घोड़ी रानी, आगरा के गणेश यादव की 50 लाख की मारवाड़ी घोड़ी लक्ष्मी के बाद कन्नौज के गुरसागंज के मोहम्मद नसुरुद्दीन की 85 लाख की दोनों घोड़ी चांदनी और चमेली रविवार को आकर्षण का केंद्र रहीं।
नसुरुद्दीन ने दोनों घोड़ियों की खूबी गिनाईं कि रूप, रंग, चाल और नाच में ये दोनों बेजोड़ हैं। बुधवार को चमेली घोड़ी 28 लाख रुपये में बिक गई। जबकि चांदनी की कीमत जमशेदपुर के नूर मोहम्मद ने 45 लाख रुपये लगाई है।
नसुरुद्दीन ने बताया कि 57 लाख रुपये से कम में इसे नहीं बेचेंगे। चांदनी की खुराक भी प्रतिदिन 1100 रुपये की आती है। 10 किलो दूध, सप्ताह में 1 दिन एक किलो घी, रोजाना 8 किलो चना इसे दिया जाता है। प्रशिक्षण के लिए 10 हजार की पगार पर उस्ताद भी रखा है। नसुरुद्दीन ने बताया कि मेले में 10 घोड़ी लेकर आए थे, जिनमें से 6 बिक गई हैं।
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घुड़दौड़ के लिए घोड़े को अभ्यास कराता घुड़सवार
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सोमवार को सुबह 11 बजे बटेश्वर मेले में जिला पंचायत द्वारा घुड़दौड़ का आयोजन किया जाएगा। जीत के लिए मेले में घोड़ों को उनके उस्तादों ने जमकर अभ्यास कराया। बरेली के हफीज ने बताया कि दौड़ में उनके घोड़े सुल्तान ने कई बार पुरस्कार जीता है।
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बटेश्वर पशु मेले में घोड़ी चांदनी
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बटेश्वर के राम सिंह आजाद, बाह के राम किशन वैद्य आदि ने बताया कि 50 साल पहले मेले में घुड़दौड़ होती थी, फिर इसे बंद कर दिया गया। पहले इसमें पुलिस और सेना के घोडे़ भी दौड़ में शामिल होते थे। बाद में यह दौड़ बंद हो गई। दोबारा इसके शुरू होने से लोग उत्साहित हैं।
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मेले में ऊंट लेकर आए व्यापारी
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राजस्थान के रेगिस्तान में बालत्तर प्रजाति के ऊंट ने ढोला मारू की प्रेम कहानी को परवान चढ़ाया था। रविवार को बटेश्वर मेले में बालत्तर प्रजाति के ऊंट देखने के साथ लोगों के बीच राजस्थान की लोक कथा की यादें भी ताजा हो गईं।
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बीकानेरी ऊंट चम्पा-चमेली
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रेगिस्तान में सबसे तेज चाल के लिए बालत्तर प्रजाति के ऊंट विख्यात है। जैसलमेर के किशनलाल बालत्तर प्रजाति के 8 ऊंट लेकर मेले में आए हैं। जिनकी कीमत 55 हजार से 1.40 लाख रुपये तक है। बाड़मेर के श्याम सुंदर भी बालत्तर प्रजाति के 9 ऊंट लेकर आए हैं।