आगरा के पुराने शहर के कालामहल क्षेत्र में बृहस्पतिवार को 250 से ज्यादा बंदरों ने गली पर कब्जा जमा लिया। बंदरों के तीन गुटों में हुई लड़ाई के कारण लोग दो घंटे तक अपने घरों में कैद रहे और बाहर नहीं निकल सके। दहशत इस कदर छा गई, कि कोई भी अपने घर से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। वहीं दोपहर दो बजे के बाद जब बच्चे स्कूलों की छुट्टी के बाद गली के बाहर पहुंचे तो घर में प्रवेश नहीं कर सके। हर घर के बाहर जमा बंदरों के काटने का खौफ इतना रहा कि लोग दो घंटे बाहर ही रहे।
एकजुट हुए लोगों ने खदेड़े बंदर
बाद में एकजुट होकर लोगों ने बड़े बड़े डंडे लेकर फटकारे, जिस पर बंदरों ने गली से कब्जा छोड़ा। इसके बाद ही स्कूली बच्चे घरों के अंदर जा सके। लोगों ने बताया कि दोपहर 12 बजे से तीन बजे तक बंदरों का आतंक बना रहा। जो लोग घर के अंदर थे, वह बाहर नहीं जा सके और जो बाहर थे, वह अंदर प्रवेश नहीं कर पाए। हर घर एक पिंजरा बन गया है।
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गली में बंदरों ने किया कब्जा
- फोटो : अमर उजाला
शहर में 40 हजार बंदर, नहीं मिली नसबंदी की अनुमति
शहर में 40 हजार से ज्यादा बंदर हैं। पांच साल तक एक दूसरे पर वन विभाग और नगर निगम जिम्मेदारी डालते रहे, पर हाईकोर्ट में दायर याचिका के बाद नगर निगम ने 10 हजार बंदर पकड़ने और उनकी नसबंदी कर उन्हीं इलाकों में छोड़ने की योजना बनाकर वन विभाग को सौंपी है, जिसे लखनऊ के प्रधान मुख्य वन संरक्षक की अनुमति नहीं मिली है। डीएफओ आदर्श कुमार ने बताया कि उच्च अधिकारियों से बंदर पकड़ने की अनुमति मांगी गई है।
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बंदरों के डर से गली के बाहर खड़े लोग
- फोटो : अमर उजाला
बच्चे को छुड़ाने पहुंचे थे 300 बंदर
एक माह पहले रावतपाड़ा में बंदर का एक बच्चा जालीदार कमरे में बंद हो गया था। इस पर पुराने शहर के 300 से ज्यादा बंदरों ने घर को घेर लिया था। घर में बुजुर्ग राधेश्याम दो घंटे तक घर से बाहर नहीं निकल सके। उन्होंने बमुश्किल बंदर के बच्चे को जाली से बाहर निकाला, बंदर बच्चे को लेकर ही घर से हटे। काला महल में ही बंदरों की घुड़की देने से युवक छत से नीचे गिर गया था।
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बंदर को लाठी लेकर भगाने का प्रयास करता युवक
- फोटो : अमर उजाला
जयपुर हाउस में करंट की फेंसिंग
पुराने शहर के साथ शहर की नई और पॉश कालोनियों में बंदरों का आतंक इस कदर है कि जयपुर हाउस में घर घर में करंट वाली फेंसिंग लोगों को लगवानी पड़ी है।
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गली को घेरे बैठे बंदर
- फोटो : अमर उजाला
बैटरी चालित डीसी करंट के तारों को बाउंड्री और छतों पर लगवाया गया है। पुराने शहर में लोगों ने करंट की जगह अपने घरों को लोहे की जाली से घेर लिया है, जो पिंजरे की तरह से नजर आने लगे हैं।