आगरा के एत्मादपुर में रिफाइंड, डिटर्जेंट और सिंथेटिक पाउडर से नकली दूध बनाया जा रहा था। सूचना पर एफएसडीए की टीम ने बुधवार को बिहारीपुर गांव में राजेंद्र सिंह की डेयरी पर छापा मारा। टीम को यहां अज्ञात रासायनिक पदार्थ भी मिले। कृत्रिम दूध की आशंका पर चार ड्रम में रखे दूध के नमूने लिए गए और इसे जब्त कर लिया गया। कीड़े व मक्खियां पड़े होने पर 650 लीटर दूध को नष्ट कराया गया। खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने दो आरोपियों के खिलाफ एत्मादपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
सेहत से खिलवाड़: रिफाइंड, डिटर्जेंट और सिंथेटिक पाउडर से बन रहा था नकली दूध, शहर-कस्बों में होता था सप्लाई
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मौके पर करीब छह किलोग्राम माल्टोडेक्सड्रिन पाउडर, दो लीटर रिफाइंड सोयाबीन ऑयल, एक किलो लिक्विड केमिकल, एक पॉलीथिन में पांच किलो अज्ञात रासायनिक पदार्थ तथा चार किलो अज्ञात रासायनिक पदार्थ लाल केन में मिला। टीम ने कृत्रिम दूध की आशंका पर चारों ड्रमों में रखे दूध के चार नमूने लिए और इसे जब्त कर लिया गया।
650 लीटर मिश्रित दूध में कीड़े व मक्खियां पड़े होने और उपभोग के योग्य न पाए जाने की वजह से नष्ट करा दिया गया। दूध के सभी नमूने और रासायनिक पदार्थ के नमूने जांच के लिए लैब भेज दिया गया है। मुकेश को पुलिस पूछताछ के साथ अपने साथ थाने ले गई।
कैंसर का कारण बन सकता है नकली दूध
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. अजय तनेजा ने बताया कि केमिकल मिलाकर तैयार किया गया नकली दूध स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। शरीर के अंदर जाने पर यह कैंसर का कारण बन सकता है। यह पाचनतंत्र को भी खराब कर देता है। उसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। इसके लगातार सेवन से किडनी भी खराब हो सकती है।
ऐसे पहचानें
प्रो. अजय तनेजा ने बताया कि सिंथेटिक व केमिकल मिले दूध की घर पर भी पहचान की जा सकती है। केमिकल मिलाकर जो नकली दूध तैयार किया जाता है, उसका स्वाद खराब हो जाता है। दूध पीते समय स्वाद खराब लगे तो उसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसकी लैब में भी जांच कराई जा सकती है। केमिकल मिला दूध गरम करने पर पीला हो जाता है। दूध को हाथ में लेकर रगड़ने पर साबुन की तरह लगता है।