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आगरा: थम गई हाईवे पर वाहनों की रफ्तार, लपटों को देखकर सहमे लोग, देखें तस्वीरें
Tue, 08 Sep 2020 12:06 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 08 Sep 2020 12:06 AM IST
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सिकंदरा स्थित फैक्टरी में लगी भीषण आग की तस्वीरें
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे सब्जी मंडी के समीप टोप्लास्ट और आगरा केमिकल नाम से दो फैक्टरी हैं। इन्हीं दोनों फैक्टरियों में सोमवार दोपहर दो बजे आग लग गई। फैक्टरियों से उठता धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर तक दिखाई दे रहा है। हाईवे पर वाहनों को रोक दिया गया, लोग सहम गए। आगरा केमिकल और टॉपलास्ट फैक्टरी में लगी आग के मामले में दमकल के अधिकारी जांच कर मालूम करेंगे कि लपटों के फैलने के पीछे कोई लापरवाही तो नहीं रही। दरअसल, सवाल यह उठ रहा है कि आग पर शुरू में ही फैक्टरी के कर्मचारी काबू क्यों नहीं कर सके और फैक्टरी में मौजूद अग्निशमन यंत्रों से आग क्यों नहीं बुझी।
आग के खौफ से दुकानों से गैस सिलिंडर ले जाते लोग
- फोटो : अमर उजाला
इससे अहम सवाल यह है कि गलत रसायन आपस में कैसे मिला दिए गए क्योंकि केमिकल फैक्टरी के कर्मचारियों को रसायनों की पहचान का विशेष रूप से प्रशिक्षण दिया जाना अनिवार्य है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी अक्षय रंजन शर्मा ने बताया कि फिलहाल आग लगने के कारण का पता नहीं लगा है। जांच से ही इसका पता चलेगा। फैक्टरी में आग बुझाने के कितने उपकरण थे और कर्मचारियों को आखिरी बार आग बुझाने का प्रशिक्षण कब दिया गया था, इसे भी दिखवाया जाएगा।
संबंधित खबर- आगरा : केमिकल फैक्टरियों में लगी भीषण आग, आसपास के घर खाली कराए गए, सेना से मांगी गई मदद
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फैक्टरी में लगी भीषण आग का धुंआ आसमान में दिखता हुआ
- फोटो : अमर उजाला
17 साल पहले भी लगी थी आग
आगरा केमिकल फैक्टरी में 17 साल पहले 2003 में भी आग लगी थी। हालांकि वह छोेटी आग थी। उस पर कुछ ही देर में काबू पा लिया गया था। फैक्टरी की स्थापना 42 साल पहले हुई। 6000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाली फैक्टरी को लाइसेंस इस शर्त पर मिला था इसमें बिजली कनेक्शन नहीं होगा।
आगरा केमिकल फैक्टरी में साझीदार राजेंद्र शर्मा का कहना है कि अभी यह नहीं मालूम चला है कि आग लगने की क्या वजह रही? हो सकता है कि रसायनों के बीच कोई क्रिया हुई हो जिससे आग लगी हो। फैक्टरी में आग बुझाने के उपकरण मौजूद थे, इनका इस्तेमाल भी किया गया लेकिन आग तेजी से फैली, इस कारण बुझ नहीं पाई।
आगरा केमिकल फैक्टरी में 17 साल पहले 2003 में भी आग लगी थी। हालांकि वह छोेटी आग थी। उस पर कुछ ही देर में काबू पा लिया गया था। फैक्टरी की स्थापना 42 साल पहले हुई। 6000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाली फैक्टरी को लाइसेंस इस शर्त पर मिला था इसमें बिजली कनेक्शन नहीं होगा।
आगरा केमिकल फैक्टरी में साझीदार राजेंद्र शर्मा का कहना है कि अभी यह नहीं मालूम चला है कि आग लगने की क्या वजह रही? हो सकता है कि रसायनों के बीच कोई क्रिया हुई हो जिससे आग लगी हो। फैक्टरी में आग बुझाने के उपकरण मौजूद थे, इनका इस्तेमाल भी किया गया लेकिन आग तेजी से फैली, इस कारण बुझ नहीं पाई।
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आग लगने के बाद बाहर सुरक्षित निलके फैक्टरी कर्मचारी
- फोटो : अमर उजाला
फैक्टरी में रसायनों को आपस में मिलाकर नया रसायन बनाने का काम चल रहा था। तभी कर्मचारी छोटू आया। उसने एक ड्रम से केमिकल निकाला और दूसरे में डाल दिया। शायद उससे कुछ गलत हो गया, क्योंकि अगले ही पल धमाके साथ ड्रम फट गया और आग लग गई। हम तेजी से पीछे हटे। देखते ही देखते केमिकल की केन और ड्रमों ने आग पकड़ ली और लपटें फैलती चली गईं... यह कहना है कि केमिकल फैक्टरी के कर्मचारी संतोष, विष्णु, बबलू, सूरज, सनी, तेजपाल, जितेंद्र और बांकेबिहारी का। ये आग लगने के समय वहां मौजूद थे।
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केमिकल फैक्टरी में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
सूरज ने बताया कि आग बहुत तेजी से फैली और इतनी ही तेजी से दहशत। दोनों फैक्टरी में कुल 150 कर्मचारी मौजूद थे। 140 बाहर निकल आए और 200 मीटर दूर जाकर खड़े हो गए। दस कर्मचारी आग बुझाने की कोशिश में लग गए। बाद में अन्य कर्मचारी भी पहुंच गए लेकिन आग फैलती ही चली गई और दूसरी फैक्टरी में पहुंच गई।
ज्वलनशील रसायनों से फैली आग
फैक्टरी में जूतों के निर्माण में काम आने वाले रसायन रखे थे। ये बेहद ज्वलनशील होते हैं। मुख्य अग्निशमन अधिकारी अक्षय रंजन शर्मा ने बताया कि इन रसायनों के कारण ही आग तेजी से फैली और बुझाने में देरी लगी।
ज्वलनशील रसायनों से फैली आग
फैक्टरी में जूतों के निर्माण में काम आने वाले रसायन रखे थे। ये बेहद ज्वलनशील होते हैं। मुख्य अग्निशमन अधिकारी अक्षय रंजन शर्मा ने बताया कि इन रसायनों के कारण ही आग तेजी से फैली और बुझाने में देरी लगी।