मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद खाली हुई मैनपुरी लोकसभा सीट पर उपचुनाव के तहत पांच दिसंबर को मतदान होगा। मैनपुरी को सपा का गढ़ कहा जाता है, 1996 से लेकर अब तक इस लोकसभा सीट पर सपा ही काबिज है। ये उपचुनाव नेताजी के बिना हो रहा है। चुनावी रण में सपा से मुलायम सिंह यादव की बहू डिंपल यादव और भाजपा से उनके शिष्य रघुराज सिंह आमने-सामने हैं। दोनों की ही अग्निपरीक्षा है, क्योंकि सपा नेताजी की विरासत वाली सीट को जीतना चाहती है, वहीं भाजपा मुलायम के शिष्य के जरिये सपा के गढ़ में सेंध लगाना चाहती है।
मैनपुरी लोकसभा सीट पर सपा के गठन के बाद से हर चुनाव में विरोधी दलों ने खूब जोर आजमाइश की, लेकिन किसी भी दल को जीत नहीं मिली। वर्ष 1996 से लेकर अब तक इस सीट से सपा प्रत्याशी की ही जीत हुई। इस बार उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने मुलायम सिंह यादव की बहू एवं सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को चुनाव मैदान में उतारा है।
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सपा प्रत्याशी डिंपल यादव
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डिंपल यादव के कंधे पर अब मुलायम की विरासत वाली सीट जीतने का भार आ गया है। उपचुनाव में सपा का मुकाबला भाजपा से है। भाजपा ने चुनावी अखाड़े में नेताजी के शिष्य एवं लंबे समय तक सपा के सिपहसालार रहे रघुराज सिंह यादव को उतारा है।
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भाजपा प्रत्याशी रघुराज शाक्य
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रघुराज सिंह को सपा की तरह चुनाव लड़ने का लंबा अनुभव है, वहीं भाजपा जैसे प्रमुख दल के वह प्रत्याशी हैं। भाजपा इस सीट को जीतने के लिए पूरी जोर आजमाइश कर रही है। मैनपुरी के रण में विजयश्री किसको मिलेगी यह यहां के मतदाताओं को तय करना है।
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रघुराज सिंह शाक्य
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सपा में सीखा राजनीति का ककहरा
रघुराज सिंह शाक्य ने समाजवादी पार्टी में ही राजनीति का ककहरा सीखा। शाक्य जाति का प्रमुख चेहरा होने के चलते वह स्थानीय राजनीति के शिखर पर पहुंच गए। सपा के टिकट पर वह दो बार इटावा लोकसभा सीट से सांसद चुने गए, तो वहीं एक बार विधायक।
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रघुराज सिंह शाक्य
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शिवपाल के समर्थन में छोड़ी थी सपा
रघुराज सिंह शाक्य को प्रसपा प्रमुख शिवपाल सिंह यादव का बेहद करीबी माना जाता है। रघुराज सिंह शाक्य ने भी शिवपाल सिंह यादव के समर्थन में सपा छोड़ दी थी। इसके बाद वह शिवपाल सिंह यादव के साथ प्रसपा में रहे। बाद में इसी वर्ष उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।