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महाशिवरात्रि: आगरा के चारों कोनों पर विराजमान हैं भगवान महादेव, भक्तों पर बरसती हैं इनकी महिमा
Fri, 21 Feb 2020 12:03 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 21 Feb 2020 12:03 AM IST
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कैलाश मंदिर
- फोटो : Amar Ujala
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महाशिवरात्रि पर ताजनगरी शिव की भक्ति में लीन हो गई है। शहर के चारों कोनों पर भगवान शिव के मंदिर के स्थापित हैं। मध्य भाग में श्री मनकामेश्वर और रावली महादेव भक्तों की रक्षा कर रहे हैं। इन शिवालयों को भव्य रूप से सजाया गया है। जानिए इन शिव मंदिरों का महत्व...।
आगरा शहर के मध्य स्थित मनकामेश्वर महादेव मंदिर
मन:कामेश्वर मंदिर : भोले बाबा ने किया था यहां विश्राम
भगवान श्रीकृष्ण जब नंदबाबा के यहां पहुंचकर बाल लीलाएं कर रहे थे, तो भगवान भोलेनाथ उनकी लीला देखने के लिए पृथ्वी पर आए। उन्होंने जिस स्थान पर विश्राम किया, वहीं पर मन:कामेश्वर मंदिर है। यहां महा शिवरात्रि का पर्व भगवान भोलेनाथ के विवाह उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
भगवान श्रीकृष्ण जब नंदबाबा के यहां पहुंचकर बाल लीलाएं कर रहे थे, तो भगवान भोलेनाथ उनकी लीला देखने के लिए पृथ्वी पर आए। उन्होंने जिस स्थान पर विश्राम किया, वहीं पर मन:कामेश्वर मंदिर है। यहां महा शिवरात्रि का पर्व भगवान भोलेनाथ के विवाह उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
सिकंदरा स्थित कैलाश महादेव मंदिर
कैलाश मंदिर : महर्षि परशुराम ने की स्थापना
पौराणिक इतिहास यह है कि त्रेतायुग में महर्षि परशुराम और उनके पिता जमदग्नि की कैलाश पर्वत से एक एक शिवलिंग ले आए थे। इसी कारण नाम पड़ा कैलाशधाम। मंदिर में दोनों शिवलिंग स्थापित हैं।
पौराणिक इतिहास यह है कि त्रेतायुग में महर्षि परशुराम और उनके पिता जमदग्नि की कैलाश पर्वत से एक एक शिवलिंग ले आए थे। इसी कारण नाम पड़ा कैलाशधाम। मंदिर में दोनों शिवलिंग स्थापित हैं।
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भगवान पृथ्वीनाथ महादेव
पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर : पृथ्वीराज चौहान ने बनावाया
किवदंती है कि पृथ्वीराज चौहान यहां आराम करने के लिए रुके तो उन्हें गड़ा शिवलिंग मिला। खोदाई के बाद भी शिविंग का दूसरा छोर नहीं मिला। उन्होंने मंदिर की स्थापना करा दी। उनके नाम पर नाम पड़ा प्रथ्वीनाथ महादेव मंदिर।
किवदंती है कि पृथ्वीराज चौहान यहां आराम करने के लिए रुके तो उन्हें गड़ा शिवलिंग मिला। खोदाई के बाद भी शिविंग का दूसरा छोर नहीं मिला। उन्होंने मंदिर की स्थापना करा दी। उनके नाम पर नाम पड़ा प्रथ्वीनाथ महादेव मंदिर।
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भगवान राजेश्वर महादेव
राजेश्वर महादेव मंदिर : 850 वर्ष पहले बनाया गया
राजाखेड़ा के एक साहूकार इस शिविलंग को मध्य प्रदेश से नर्मदा नदी से लाए थे। वह राजाखेड़ा जा रहे थे। रात में राजपुर चुंगी पर रुके, स्वप्न आया कि मंदिर स्थापना यहीं की जाए। उन्होंने विश्वास नहीं किया लेकिन शिवलिंग को तमाम कोशिश कर भी ले जा नहीं पाए। बाद में यहीं पर मंदिर का निर्माण हुआ।
राजाखेड़ा के एक साहूकार इस शिविलंग को मध्य प्रदेश से नर्मदा नदी से लाए थे। वह राजाखेड़ा जा रहे थे। रात में राजपुर चुंगी पर रुके, स्वप्न आया कि मंदिर स्थापना यहीं की जाए। उन्होंने विश्वास नहीं किया लेकिन शिवलिंग को तमाम कोशिश कर भी ले जा नहीं पाए। बाद में यहीं पर मंदिर का निर्माण हुआ।