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महाशिवरात्रि: 117 साल बाद बन रहा दुर्लभ योग, शिव-पार्वती की पूजा से बनेंगे बिगड़े काम

Fri, 21 Feb 2020 12:31 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Fri, 21 Feb 2020 12:31 AM IST
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Maha shivaratri 2020 Worship of Shiva Parvati For Rashi
बटेश्वर के मंदिर पूजा करते श्रद्घालु - फोटो : अमर उजाला
महाशिवरात्रि पर इस बार 117 साल बाद शनि और शुक्र का दुर्लभ योग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य शिव शरण पाराशर ने बताया कि शनि अपनी स्वयं की राशि मकर में और शुक्र ग्रह अपनी उच्च राशि मीन में रहेगा। इस योग में शिव पार्वती की पूजा से सभी बिगड़े काम बनेंगे। 
Maha shivaratri 2020 Worship of Shiva Parvati For Rashi
बटेश्वर मंदिर - फोटो : अमर उजाला
Jiज्योतिषाचार्य शिव शरण पाराशर ने बताया कि इससे पहले 25 फरवरी 1903 को यह योग बना था। कहा कि शुक्रवार को सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा। पूजन के लिए और नए कार्यों की शुरुआत करने के लिए ये योग भी शुभ माना जाता है। बुध और सूर्य कुंभ राशि में एक साथ रहेंगे, जिससे बुध-आदित्य योग बनेगा। शुक्रवार को शाम 5.20 बजे से चर्तुदशी तिथि लगेगी और शनिवार की शाम 7.02 बजे तक रहेगी। बटेश्वर मंदिर के पुजारी राकेश वाजपेयी ने बताया कि महाशिवरात्रि पर दुर्लभ योग बनने की वजह से काल सर्प दोष आदि से मुक्ति के लिए अनुष्ठान कराने के लिए भक्त पहुंचने लगे हैं।

 
Maha shivaratri 2020 Worship of Shiva Parvati For Rashi
बटेश्वर - फोटो : अमर उजाला
ज्योतिषाचार्य शिव शरण पाराशर के मुताबिक महाशिवरात्रि पर राशि के अनुसार पूजा करने पर भोले की कृपा बरसेगी। मेष राशि वाले दूध, धतूरा, वृषभ राशि वाले गन्ने के रस, इत्र, मिथुन राशि वाले कुमकुम, चंदन, इत्र, कर्क राशि वाले बेर, चंदन, सिंह राशि वाले फलों के रस, मिश्री, कन्या राशि वाले बेर, धतूरा, तुला राशि वाले पुष्प, चावल, वृश्चिक राशि वाले शहद, घी, धनु राशि वाले बिल्व पत्र, पुष्प, मकर राशि वाले गेहूं, कुंभ राशि वाले सफेद काले तिल, मीन राशि वाले बिल्व पत्र से शिव की पूजा अर्चना कर विशेष पुन्य लाभ अर्जित कर सकते हैं।
 
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Maha shivaratri 2020 Worship of Shiva Parvati For Rashi
कांवड के साथ महिला शिवभक्त - फोटो : अमर उजाला
महाशिवरात्रि पर बटेश्वर में भोलेनाथ के अभिषेक को पहुंचने वाले कांवड़ियों से मंदिर के पुजारी जय प्रकाश गोस्वामी ने कांच की शीशी में गंगाजल न ले आने का आह्वान किया है। बताया कि शीशी गिरकर टूटने से श्रद्धालुओं के पैर जख्मी होने का खतरा बना रहता है। इधर, महाशिवरात्रि से पहले ही बटेश्वर में कांवडियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। बुधवार को भिंड, मुरैना, धौलपुर आदि जिले के तमाम कांवड़िए सोरों से गंगा जल लेकर बटेश्वर पहुंचे। अटेर के अर्जुन सिंह, ममता, सासपुरा के दिमान सिंह, मायाराम, बाजना के कलियान सिंह, शीतल ने बताया कि मन्नत पूरी होने पर सोरों से कांवड़ में गंगाजल भर कर लाए हैं। बताया कि बटेश्वर नाथ का अभिषेक कर दिया है। महाशिवरात्रि पर अपने गांव के शिवालय में अभिषेक करेंगे।       
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Maha shivaratri 2020 Worship of Shiva Parvati For Rashi
निर्माणाधीन घाटों की बैरिकेडिंग - फोटो : अमर उजाला
महाशिवरात्रि पर यमुना स्नान के दौरान हादसे न हों, इसके लिए बटेश्वर के निर्माणाधीन घाटों पर बैरिकेडिंंग करा दी गई है। महाशिवरात्रि पर्व पर बटेश्वर में स्नान पूजन के लिए लाखों श्रद्धालु पहुंचते है। मंदिर श्रृंखला और कांवड़ियों के मार्ग पर प्रकाश व्यवस्था कराई जा रही है। ब्रह्मलाल जी मंदिर के बाहर भी आने जाने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग कराई गई है। पुलिस प्रशासन और तीर्थ स्थल ट्रस्ट श्रद्धालुओं की सुविधा के लिहाज से घाटों से लेकर मंदिर तक चाक चौबंद इंतजाम करने में जुटे हैं।
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