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स्वयं भगवान परशुराम ने की स्थापना, दुर्लभ हैं दो शिवलिंग के ऐसे दर्शन, जानिये दस हजार वर्ष पुराने मंदिर की विशेषता

Mon, 20 Jul 2020 09:54 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Mon, 20 Jul 2020 09:54 AM IST
सार

तीसरे सोमवार को आगरा में स्थानीय अवकाश रखा जाता है।
 

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Lord Shiv In Kailash Mandir Know History Of Temple
कैलाश मंदिर - फोटो : अमर उजाला
श्रावण मास के तीसरे सोमवार को आगरा में कैलाश महादेव मंदिर में मेले का आयोजन होता है। लेकिन कोरोना महामारी के चलते इस बार मेला और धार्मिक आयोजन नहीं हो रहा है। महादेव के दर्शन ऑनलाइन कराए जा रहे हैं। लेकिन कैलाश मंदिर की एक विशेषता है, जिसके चलते तीसरे सोमवार को आगरा में स्थानीय अवकाश रखा जाता है।
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आगरा के कैलाश मंदिर में स्थापित शिवलिंग - फोटो : अमर उजाला
मंदिर के महंत गौरव गिरी ने बताया कि कैलाशपति महादेव का दरबार दस हजार वर्ष से भी अधिक पुराना है। यहां एक साथ दो शिवलिंग मंदिर की महिमा को और भी बढ़ाते हैं। मान्यता है कि ऐसा संयोग दुलर्भ ही मिलता है। शिवलिंग भगवान परशुराम और उनके पिता ऋषि जमद्गिनी के द्वारा स्थापित किए गए थे। दोनों ने मंदिर में एक-एक शिवलिंग स्थापित किया। बहुत कम मंदिरों में दो शिव लिंग स्थापित हैं। महर्षि परशुराम के पिता की माता का आश्रम रेणुका धाम भी यहां से बमुश्किल छह किलो मीटर की दूरी पर स्थित है।
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कैलाश महादेव मंदिर में स्थापित हैं दो शिवलिंग - फोटो : अमर उजाला
मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान् विष्णु के छठवें अवतार भगवान् परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि कैलाश पर्वत पर भगवान शिव की आराधना करने गए। दोनों पिता-पुत्र की कड़ी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान मांगने को कहा। इस पर भगवान परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि ने उनसे अपने साथ चलने और हमेशा साथ रहने का आशीर्वाद मांग लिया। इसके बाद भगवान शिव ने दोनों पिता-पुत्र को एक-एक शिवलिंग भेंट स्वरुप दिया।
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कैलाश महादेव मंदिर में स्थापित हैं दो शिवलिंग - फोटो : अमर उजाला
जब दोनों पिता-पुत्र यमुना किनारे अग्रवन में बने अपने आश्रम रेणुका के लिए चले (रेणुकाधाम का अतीत श्रीमद्भागवत गीता में वर्णित है) तो आश्रम से छह किलोमीटर पहले ही रात्रि विश्राम को रुके। फिर सुबह होते ही दोनों पिता-पुत्र हर रोज की तरह नित्य कर्म के लिए गए। इसके बाद ज्योर्तिलिंगों की पूजा करने के लिए पहुंचे, तो वह जुड़वा ज्योर्तिलिंग वहीं स्थापित हो गए।
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आगरा का कैलाश महादेव मंदिर
इन शिवलिंगों को महर्षि परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि ने काफी उठाने का प्रयास किया, लेकिन उस जगह से उठा नहीं पाए। हारकर दोनों पिता-पुत्र ने उसी जगह पर दोनों शिवलिंगों की पूजा अर्चना कर पूरे विधि-विधान से स्थापित कर दिया और तब से इस धार्मिक स्थल का नाम कैलाश पड़ गया।
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