सूरज की तपिश और लू के थपेड़ों ने आम जनजीवन बेहाल कर दिया है, लेकिन सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले मासूम बच्चों के लिए यह स्थिति किसी सजा से कम नहीं है। सोमवार को जब शहर के परिषदीय स्कूलों का जमीनी हाल जाना, तो अव्यवस्थाओं की पोल खुल गई। कहीं बच्चे प्यास बुझाने के लिए गर्म पानी पीने को मजबूर हैं, तो कहीं गंदगी के बीच बैठने की मजबूरी है।
लोहामंडी स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय की स्थिति सबसे ज्यादा चौंकाने वाली रही। यहां लगभग 800 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन भीषण गर्मी में उनके लिए ठंडे पानी का कोई इंतजाम नहीं है। प्रधानाचार्य वर्जित कौर ने कहा कि यह सरकारी स्कूल है, यहां ठंडा पानी नहीं मिलता। हैरानी की बात यह है कि स्कूल में मिनरल वाटर वाले कैंपर तो मौजूद हैं, लेकिन उन्हें बच्चों के उपयोग के बजाय ताले में बंद कर रखा गया है। स्कूल में कुल 6 शौचालय हैं, जिनमें से 4 पर शिक्षकों का कब्जा है। शिक्षक इस्तेमाल के बाद शौचालय में ताला लगा देते हैं, जिससे 800 बच्चों के हिस्से में केवल 2 शौचालय ही आते हैं।
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पानी की टंकी
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ककरेठा प्राथमिक विद्यालय में है गंदगी का अंबार
यही हाल ककरेठा स्थित प्राथमिक विद्यालय का भी मिला। यहां 5 कक्षाओं का संचालन महज 3 शिक्षक कर रही थी। स्कूल परिसर में पीने के पानी वाले स्थान पर गंदगी का अंबार लगा है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
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ग्रीन नेट के नीचे हो रही पढ़ाई
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ग्रीन नेट के नीचे हो रही पढ़ाई
बापू नगर स्थित प्राथमिक विद्यालय में पिछले साल छत गिरने के बाद बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। मरम्मत का टेंडर अब जाकर पास हुआ है, जिसके चलते फिलहाल पढ़ाई ग्रीन नेट के साये में हो रही है।
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आगरा सरकारी स्कूल
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जनगणना कार्य में ड्यूटी होने से स्टाफ की कमी
सिकंदरा स्थित प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था बदहाली के दौर से गुजर रही है। विद्यालय में पड़ताल में शिक्षिका सविता ने बताया कि स्कूल में कुल पांच कक्षाएं संचालित हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने की जिम्मेदारी महज दो शिक्षकों के कंधों पर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले शिक्षकों की ड्यूटी एसआईआर में लगाई गई थी और अब जनगणना कार्य में ड्यूटी लगने के कारण स्टाफ की कमी हो गई है। ऐसे में दो शिक्षकों के लिए एक साथ पांच कक्षाओं को संभालना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना चुनौती बन गया है।
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सरकारी स्कूल
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एक लाख रुपये तक खर्च करने का प्रावधान
अब स्कूलों का बजट वहां मौजूद छात्र संख्या (जनसंख्या) के आधार पर पास किया जाएगा। प्रशासनिक सुधारों के तहत, स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं और रखरखाव पर लगभग 1 लाख रुपये खर्च करने का प्रावधान है। इस राशि का उपयोग पेयजल, स्वच्छता, और मरम्मत जैसे कार्यों के लिए किया जाता है। संवाद