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लॉकडाउन में गरीब पिता का दर्द: इलाज के लिए रुपये नहीं थे, एक बेटी ने तोड़ा दम, दूसरी है बीमार

Fri, 08 May 2020 12:09 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 08 May 2020 12:09 AM IST
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lockdown poor father seeks help for treatment of sick daughter in   agra
परिवार के साथ जूता कारीगर राम सिंह - फोटो : अमर उजाला

घर में अन्न का एक दाना नहीं है, बेटी बीमार हुई तो इलाज कराने के लिए पैसे नहीं थे, उसने 28 अप्रैल को दम तोड़ दिया, अब दूसरी बेटी की भी तबीयत खराब है, कोई तो मेरी मदद करे...। यह गुहार आगरा के वॉटरवर्क्स चौराहे के पास मलिन बस्ती में किराए पर रहने वाले जूता कारीगार राम सिंह की है। लॉकडाउन में गरीब पिता की गुहार के बाद कई लोग उसकी मदद को आगे आए हैं। 

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जूता कारीगर राम सिंह की बेटी दीपेश - फोटो : अमर उजाला
उसने आसपास के लोगों से बुधवार को कहा कि अब बहुत मुश्किल हो रही है। 28 अप्रैल को उसकी 11 साल की बेटी वैष्णवी ने दम तोड़ दिया। वो बीमार थी, लेकिन दवाई तो दूर उसे खिलाने के लिए उसके पास खाना तक नहीं था। लकड़ियां बीनकर यमुना किनारे उसका दाह संस्कार किया। अब उससे बड़ी बेटी दीपेश की तबीयत खराब है। उसे कहां ले जाए क्योंकि उसके पास पैसा नहीं है। 
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जूता कारीगर राम सिंह - फोटो : अमर उजाला
राम सिंह ने बताया कि वो ठेके पर फिटर का काम करता है। लॉकडाउन में बेरोजगार है। पत्नी बबिता, बेटी दीपेश (13), परी (सात), बेटे भारत (पांच) का पेट भरना बहुत मुश्किल हो रहा है। चूल्हा ठंडा है। सिलिंडर में गैस तक नहीं है। 
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परिवार के साथ जूता कारीगर राम सिंह - फोटो : अमर उजाला
कुछ दिन पहले तक पुलिस चौकी सामने बने क्वारंटीन सेंटर में आने वाले खाने के पैकेट में से बचे हुए पैकेट पुलिसवाले उसे दे देते थे, पेट भर जाता था। सेंटर बंद होते ही मुसीबत आ गई। पहले कौशलपुर में अपना मकान था। पत्नी बबिता को फालिज पड़ गया। उसे मकान बेचना पड़ा।
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वैष्णवी का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
बेटी की मौत के बाद आया परीक्षा का रिजल्ट 
राम सिंह ने बताया कि बेटी पास के स्कूल में पढ़ती थी। उसके पास बुधवार को प्रधानाचार्य का फोन आया। बोले, वैष्णवी पास हो गई है। उसकी आगे की पढ़ाई ऑनलाइन चलेगी। तब उन्न्होंने प्रधानाचार्य को बताया कि बेटी की मौत हो गई है। प्रधानाचार्य ने समाजसेवियों को इसकी जानकारी दी।
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