मुझे बोलेरो में सीट के नीचे लिटा दिया था। दो घंटे बाद एक सुनसान जगह पर बदमाश ले गए। एक घर में रखा गया। बदमाश आंखों पर पट्टी बांधकर रखते थे। मुंह पर टेप भी लगाते थे। खाने के लिए कभी रोटी सब्जी तो कभी रोटी दाल देते थे। हर दिन यही दुआ करता था कि पुलिस कब छुड़ाएगी। जैसे-जैसे दिन निकलते गए, उम्मीद भी कम होती जा रही थी। मगर, सोमवार रात को पुलिस आई और मुझे मुक्त करा लिया। यह कहते हुए अधिवक्ता अकरम अंसारी की आंखें भर आईं।
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अधिवक्ता अपने परिवार के साथ
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बता दें कि आगरा के सिकंदरा क्षेत्र से तीन फरवरी को अगवा फिरोजाबाद के अधिवक्ता अकरम अंसारी 14 दिन बाद अपहरणकर्ताओं के चंगुल से मुक्त हो गए। उन्हें अगवा कर 50 लाख रुपये फिरौती मांगी गई थी। तीन बार कॉल किया गया था। पुलिस टीमों ने धौलपुर के बीहड़ में डेरा डाल रखा था। सोमवार को अधिवक्ता को धौलपुर के बाड़ी से मुक्त करा लिया गया। गिरोह के सरगना सहित छह अपहरणकर्ताओें को भी पकड़ा गया है।
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वकील अकरम अंसारी
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अकरम अंसारी का कहना था कि जिस तरह का माहौल चल रहा है उससे लग रहा था कि अपहरणकर्ताओं के चंगुल से मुक्त नहीं हो पाऊंगा। मगर, पुलिस ने जो काम किया, उसका तहे दिल से शुक्रिया करता हूं। पुलिस लाइन में प्रेस वार्ता के दौरान अकरम ने पुलिस अधिकारियों को मिठाई खिलाई। उनका धन्यवाद दिया।
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पुलिस अफसरों को शुक्रिया बोलते अधिवक्ता अकरम
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अकरम अंसारी का कहना था कि वह एक समय ही खाना खाते थे। दहशत की वजह से नींद नहीं आती थी। उन्हें डर था कि परिजन अपहरणकर्ताओं की मांग पूरी नहीं कर पाएंगे। उनका घर वापस जाना मुश्किल होगा। मंगलवार को पुलिस लाइन में अकरम के भाई मोउज्जम, असलम, मोहम्मद सोहेल, मुकर्रम और पिता आरिफ अंसारी आए थे। भाइयों ने अकरम को गले लगा लिया। परिवार से मिलकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था।
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बोत्रे, रोहन प्रमोद, एसपी सिटी
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एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने बताया कि गैंग के सरगना उग्रसेन और सुरेंद्र पर कई मुकदमे दर्ज हैं। इनमें अपहरण और जानलेवा हमले के मुकदमे शामिल हैं। वह जेल भी जा चुके हैं। राजस्थान पुलिस की मदद से अपहरणकर्ताओं का आपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है।