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कृष्ण जन्माष्टमी 2018: वर्षों बाद बन रहा अद्भुत संयोग, श्रीमद्भागवत में इस खगोलीय घटना का जिक्र

Sun, 02 Sep 2018 08:14 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला मथुरा Updated Sun, 02 Sep 2018 08:14 AM IST
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krishna janmashtami 2018 shubh muhurat time puja vidhi in hindi
krishna janmashtami 2018 - फोटो : अमर उजाला
भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाने के लिए मथुरा नगरी सज धजकर तैयार हो गई है। भक्तों के आने का सिलसिला जारी है। इस बार जन्माष्टमी पर अद्भुत संयोग बना है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार तीन सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी पर ठीक वैसा ही संयोग बना है, जैसा द्वापर युग में कान्हा के जन्म के समय बना था। इस अद्भुत संयोग को कृष्ण जयंती के नाम से जाना जाता है।  

कृष्ण जन्माष्टमी 2018: वर्षों बाद बन रहा अद्भुत संयोग, श्रीमद्भागवत में इस खगोलीय घटना का जिक्र

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जन्माष्टमी के संयोग और नक्षत्र गड़बड़ाए
द्वापर युग में चंद्रवंशी श्रीकृष्ण के जन्म के समय हुई खगोलीय घटना इस बार भी तीन सितंबर को फिर घटित होगी। जहां एक ओर आकाश में चंद्रमा का उदय होगा, वहीं दूसरी ओर ब्रज में कान्हा का प्राकट्य मनाया जाएगा। श्रीकृष्ण के जन्म के साथ जुड़ी इस घटना का उल्लेख श्रीमद्भागवत के दसवें स्कंध में भी देखने को मिलता है। 

कृष्ण जन्माष्टमी 2018: वर्षों बाद बन रहा अद्भुत संयोग, श्रीमद्भागवत में इस खगोलीय घटना का जिक्र

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krishna janmashtami 2018
श्रीमद्भागवत कथा आयोजन समिति के संस्थापक पंडित अमित भारद्वाज बताते हैं कि प्रतिवर्ष दोनों ही घटनाएं एक साथ घटित होती हैं। इस वर्ष तीन सितंबर को भी अर्धरात्रि में चंद्रमा का उदय होगा। इस दिन चंद्रोदय का समय स्थानीय समयानुसार रात्रि 12 बजकर 5 मिनट रहेगा। 
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krishna janmashtami 2018 - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि द्वापर में जब कान्हा का जन्म हुआ, वो दिन बुधवार का रहा। हालांकि इस वर्ष कान्हा सोमवार को जन्म लेंगे। बुध को चंद्रमा का पुत्र माना जाता है। इसी कारण नारायण ने चंद्रमा के वंशज के रूप में बुधवार को ही जन्म लिया।  
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इस्कॉन मंदिर में 14 से 16 तक जन्माष्टमी महोत्सव - फोटो : अमर उजाला
रोहिणी को चंद्रमा की सबसे प्रिय पत्नी व सबसे प्रिय नक्षत्र की संज्ञा दी गई है। इसी के दृष्टिगत कान्हा ने भी रोहिणी नक्षत्र में जन्म लिया। स्पष्ट है कि एक पूर्व नियोजित व व्यवस्थित वातावरण में श्रीहरि विष्णु बालकृष्ण के रूप में अवतरित हुए।
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