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शहीद की अंतिम विदाई: तिरंगे में लिपटे बेटे को देख रो-रोकर बेसुध हुई मां, पिता के नहीं थमे आंसू

Sat, 04 Jul 2020 10:54 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 04 Jul 2020 10:54 AM IST
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Kanpur Encounter Martyr Jitendra Pal Funeral In Mathura
शहीद जितेंद्र की अंतिम विदाई - फोटो : अमर उजाला
कानपुर मुठभेड़ में शहीद हुए मथुरा के सिपाही जितेंद्र पाल को शनिवार की सुबह नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। पैतृक गांव बरारी में शहीद का अंतिम संस्कार किया गया। आगरा रेंज के आईजी, एसएसपी, डीएम और जिले के विधायकों ने पुष्प अर्पित कर शहीद को नमन किया। छोटे भाई सुरेंद्र उर्फ सौरभ ने चिता को मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा में आसपास के गांवों के सैकड़ों लोग शामिल हुए। सबकी आंखें नम थीं।
Kanpur Encounter Martyr Jitendra Pal Funeral In Mathura
शहीद जितेंद्र की अंतिम विदाई - फोटो : अमर उजाला
टाउनशिप क्षेत्र के गांव बरारी निवासी सिपाही जितेंद्र कानपुर में हुई मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। शुक्रवार रात तकरीबन डेढ़ बजे शहीद का पार्थिव शरीर कानपुर से गांव बरारी लाया गया। यहां शहीद के अंतिम दर्शन को पहले से ही लोग एकत्र थे। जैसे शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, भारत माता की जय के नारे लगने लगे। 
Kanpur Encounter Martyr Jitendra Pal Funeral In Mathura
शहीद जितेंद्र की अंतिम विदाई - फोटो : अमर उजाला
तिरंगे में लिपटे शहीद बेटे को देखकर मां रानी देवी रो-रोकर बेसुध हो गईं। छोटी बहन पूजा का भी रो-रोकर बुरा हाल था। दोनों भाई किसी तरह मां और बहन को संभाल रहे थे। छोटी बहन पूजा रो-रोकर यही कहती रही कि भैया तुम कब आओगे। जवान बेटे को खोने के गम में पिता तीर्थपाल के आंसू नहीं थम रहे थे।
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शहीद जितेंद्र की अंतिम विदाई - फोटो : अमर उजाला
शनिवार की सुबह जिलाधिकारी सर्वज्ञ राम मिश्र, आगरा रेंज के आईजी ए सतीश गणेश, एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर समेत कई अधिकारी बरारी पहुंच गए। सभी ने शहीद को श्रद्धांजलि दी। गोवर्धन के विधायक ठाकुर कारिंदा सिंह और बलदेव के विधायक पूरन प्रकाश ने भी पुष्प अर्पित कर शहीद को नमन किया। शहीद के अंतिम दर्शन को आसपास के सैकड़ों लोग उमड़े। पुलिस अधिकारियों ने शहीद के परिवार को सांत्वना दी। 
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शहीद की चिता को मुखाग्नि देता भाई - फोटो : अमर उजाला
जितेंद्र के पिता तीर्थपाल करीब 12 वर्ष पूर्व अपना पैतृक गांव बरारी छोड़कर नवादा तंतूरा में आकर रहने लगे थे। जितेंद्र चार भाई-बहन में सबसे बड़े थे। उनकी उम्र करीब 26 वर्ष थी और अविवाहित थे। यह जानकारी देते-देते जितेंद्र के भाई सुरेंद्र की आंखों में आंसू आ गए। बताया कि भैया की एक जुलाई को फोन पर मां से बात भी हुई थी। 
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