आगरा में बढ़ते प्रदूषण का असर: धूल-धुएं से 940 लोग हुए बीमार, दो मरीजों को पड़ा अस्थमा अटैक, सेहत का रखें ख्याल
आंख में जलन, पानी आ रहा, कॉर्निया पर जख्म
एसएन के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु यादव ने बताया कि ओपीडी में 97 मरीज देखे, जिसमें से धूल-धुआं आंखों में जाने से 33 को आंख में जलन, पानी आना, खुजली होने की परेशानी मिली। जलन पर बच्चों ने जलन होने पर उसे रगड़ दिया, जिससे कॉर्निया पर जख्म हो गए और लाल पड़ गई।
एसएन के ईएनटी रोग विभाग के डॉ. अखिल प्रताप सिंह ने बताया कि 112 मरीजों में 32 मरीजों के धूल-धुआं गले में पहुंचने पर गले में खराश, दर्द होना, सूजन की परेशानी मिली। नाक में खुजली और बार-बार छींकें भी आ रही हैं। जुकाम भी हो रहा है। इनमें बच्चों की संख्या लगभग आधी है।
बच्चों की सांस फूली, सूज गए टोंसिल
एसएन के बाल रोग विभाग की डॉ. मधु नायक ने बताया कि ओपीडी में 107 बच्चे देखे, इनमें से 37 बच्चों के प्रदूषण के चलते बीमार हो गए। दमा पीड़ित बच्चों के सांस नहीं ले पाए, रातभर रोते रहे, टोंसिल भी सूज गए हैं। जुकाम-खांसी और की भी परेशानी मिली। दो बच्चों को भर्ती किया है।
हाथ-गर्दन में खुजली, हुई त्वचा एलर्जी
एसएन के त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. यतेंद्र चाहर ने बताया कि 287 मरीजों में से 96 मरीजों में धूल-धुआं के चलते त्वचा की एलर्जी मिली। इसे स्किन एलर्जी कहा जाता है, इसमें धूल-कार्बन तत्व त्वचा की ऊपरी सतह पर चिपक जाने से खुजली शुरू करते हैं। लगातार खुजाने से लाल चकत्ते पड़ गए।
जुकाम-खांसी के साथ सांस भी उखड़ी
मेडिसिन विभाग के डॉ. टीपी सिंह ने बताया कि 324 मरीज देखे गए, इसमें से 136 को प्रदूषण के चलते परेशानी हुई। इनमें जुकाम-खांसी के साथ सीने में जकड़न बताई। बताया कि तीन-चार दिन से परेशानी होने से रात में सो भी नहीं पा रहे। इनमें जांच कराने पर नली में सूजन और फेफड़ों में भी परेशानी मिली। इनमें से तीन मरीजों को भर्ती कराया है।
- दमा रोगी इन्हेलर लें।
- सांस रोगी दवा का डोज बढ़वाएं
- शाम को गर्म पानी की भाप लें।
- गुनगुने पानी से गरारे करें।
- सुबह-शाम न टहलें।
- सुबह-शाम घर की खिड़की बंद रखें।
- मास्क लगाकर बाहर जाएं।
- आसपास पानी का छिड़काव करें।
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