बरसाना-नंदगांव के बाद गुरुवार को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर होली का आनंद बरसा। रंगभरनी एकादशी पर मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर ठाकुरजी ने भक्तों के साथ होली खेली। मंदिर परिसर में फूल, गुलाल और लठामार होली का भव्य आयोजन किया गया। इससे पूरा परिसर होली के रंगों से सराबोर हो गया। अपने आराध्य की दिव्य होली के साक्षी बनने के लिए दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। कई प्रदेशों से आए कलाकारों ने रसिया, होली गीतों और नृत्य प्रस्तुत कर भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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राधा-कृष्ण स्वरूप की आरती करते कार्ष्णि गुरु शरणानंद
- फोटो : अमर उजाला
रंगभरनी एकादशी पर महोत्सव का शुभारंभ गणपति एवं ब्रज वंदना के साथ कार्ष्णि गुरु शरणानंद ने रसभरी सरकार एवं प्रियाजू को पुष्पार्चन और आरती से किया। पहली बार केशव वाटिका में इस आयोजन में ब्रज के रसिक कलाकारों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां देकर प्रिया-प्रियतम की होली लीला की साक्षात अनुभूति कराई।
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होली के मंच पर प्रस्तुति देते कलाकार
- फोटो : अमर उजाला
कई प्रदेशों से आए कलाकारों ने मंच पर रसिया, होली गीत और नृत्य प्रस्तुत कर कान्हा के भक्तों मंत्रमुग्ध कर दिया। जन्मभूमि पर ब्रज की होली लीला, हरियाणा के घूमर, फाग, राजस्थान के लोकगीत और नृत्य का संगम देखने को मिला। ब्रज के चरकुला नृत्य और बंब रसिया की प्रस्तुति से भक्तों का मन मोह लिया।
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राधा-कृष्ण के स्वरूप ने खेली फूलों की होली
- फोटो : अमर उजाला
श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में बने मंच पर राधाकृष्ण के स्वरूपों ने फूलों की होली खेली। सतरंगी पुष्पवर्षा के मध्य फूल होली के दर्शन अत्यंत मनोहारी और सजीव थे। इस अलौलिक होली का भक्तों ने भी जमकर आनंद लिया।
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श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर हुई लठामार होली
- फोटो : अमर उजाला
रावल एवं श्रीकृष्ण संकीर्तन मंडल के हुरियारे और हुरियारिनों ने लठामार होली खेली। रंग-गुलाल के बीच हुरियारिनों की प्रेम पगी लाठियां हुरियारों पर बरसने लगीं। हुरियारिनों की लाठियों से बचने को ढाल लिए घुटने के बल बैठने को मजबूर थे।