ब्रज के होनहार विश्व भर में हिंदी की पताका फहरा रहे हैं। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बसे ब्रज की माटी के यह लाल हिंदी का परचम बुलंद किए हुए हैं। किसी ने वहां रह रहे भारतीय मूल के बच्चों को ही हिंदी पढ़ाने का बीड़ा उठा लिया तो कोई ऑनलाइन माध्यमों से हिंदी का प्रचार-प्रसार कर रहा है। यूट्यूब चैनल और ब्लॉग लेखन के जरिये भी वे हिंदी का मान बढ़ा रहे हैं और हिंदी के हम के नारे को आगे लेकर चल रहे हैं। उनके साथ वहां रह रहे कई अन्य हिंदी भाषी युवाओं का कारवां भी जुड़ता जा रहा है।
{"_id":"613fa4d48ebc3e5acc32b537","slug":"hindi-divas-news-hindi-hain-hum-people-of-braj-promoting-hindi-in-foreign-countries","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"हिंदी हैं हम: अमेरिका से लेकर रूस और इटली तक हिंदी की पताका फहरा रहे ब्रजवासी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिंदी हैं हम: अमेरिका से लेकर रूस और इटली तक हिंदी की पताका फहरा रहे ब्रजवासी
Tue, 14 Sep 2021 01:02 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 14 Sep 2021 01:02 AM IST
विज्ञापन
अनुपम परिहार व उनकी पत्नी स्वेतलाना रॉबर्टनोवा
- फोटो : अमर उजाला
स्वाति चौहान
- फोटो : अमर उजाला
बच्चों को सिखाती हैं हिंदी
लंगड़े की चौकी की रहने वाली स्वाति अमेरिका में रहती हैं। पति शैलेंद्र सिंह वैज्ञानिक हैं। तीनों बच्चों का विदेश में ही जन्म हुआ लेकिन स्वाति का हिंदी लगाव ऐसा है कि उनसे अपनी मातृभाषा में ही बात करती हैं। स्वाति सिंह ने कहा कि हिंदी भाषी दोस्तों और बच्चों की मित्रों को हिंदी में बात करने के लिए प्रेरित करती हैं। ऑनलाइन हिंदी के लेख लिखती हैं।
लंगड़े की चौकी की रहने वाली स्वाति अमेरिका में रहती हैं। पति शैलेंद्र सिंह वैज्ञानिक हैं। तीनों बच्चों का विदेश में ही जन्म हुआ लेकिन स्वाति का हिंदी लगाव ऐसा है कि उनसे अपनी मातृभाषा में ही बात करती हैं। स्वाति सिंह ने कहा कि हिंदी भाषी दोस्तों और बच्चों की मित्रों को हिंदी में बात करने के लिए प्रेरित करती हैं। ऑनलाइन हिंदी के लेख लिखती हैं।
फ्रांस में रहते हैं दिलीप जिंदल
- फोटो : अमर उजाला
हिंदी में लिख रहे फैशन की गाथा
फ्रांस में रहने वाले दिलीप जिंदल ने कहा कि मथुरा में साहित्य प्रेमी ससुराल मिली। पत्नी निहारिका भी हिंदी की लेखिका हैं। खुद लंबे समय से फ्रांस में निवास कर रहे हैं। हिंदी से इतना लगाव है कि फ्रांसीसी फैशन इंडस्ट्री पर हिंदी में ही कई लेख लिख दिए। जब मौका मिलता है ब्रज की माटी की खुशबू लेने चले आते हैं। हिंदीभाषा अभिभावकों के बच्चों को हिंदी में बात करने के लिए प्रेरित करते हैं।
फ्रांस में रहने वाले दिलीप जिंदल ने कहा कि मथुरा में साहित्य प्रेमी ससुराल मिली। पत्नी निहारिका भी हिंदी की लेखिका हैं। खुद लंबे समय से फ्रांस में निवास कर रहे हैं। हिंदी से इतना लगाव है कि फ्रांसीसी फैशन इंडस्ट्री पर हिंदी में ही कई लेख लिख दिए। जब मौका मिलता है ब्रज की माटी की खुशबू लेने चले आते हैं। हिंदीभाषा अभिभावकों के बच्चों को हिंदी में बात करने के लिए प्रेरित करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रतीक सिंह
- फोटो : अमर उजाला
कुवैत में हिंदी प्रेमी संस्था बनाई
राजा लक्ष्मण सिंह परिवार से ताल्लुक रखने वाले प्रतीक सिंह बचपन से ही हिंदी प्रेमी हैं। उन्होंने बताया कि वह काम के सिलसिले में कुवैत रहते हैं। वहां हिंदी प्रेमी नाम से हिंदी भाषियों का एक दल बनाया है। हर रविवार किसी सदस्य के घर में हिंदी गद्य और पद्य पर चर्चा होती है। गैर हिंदी भाषी युवा भी इसमें शामिल होते हैं। देर रात तक महफिल सजती है।
राजा लक्ष्मण सिंह परिवार से ताल्लुक रखने वाले प्रतीक सिंह बचपन से ही हिंदी प्रेमी हैं। उन्होंने बताया कि वह काम के सिलसिले में कुवैत रहते हैं। वहां हिंदी प्रेमी नाम से हिंदी भाषियों का एक दल बनाया है। हर रविवार किसी सदस्य के घर में हिंदी गद्य और पद्य पर चर्चा होती है। गैर हिंदी भाषी युवा भी इसमें शामिल होते हैं। देर रात तक महफिल सजती है।
विज्ञापन
फ्रांस की क्रिस्टेल येवान और रूस की एलेसिया माकोवस्काया
- फोटो : अमर उजाला
हिंदी है इन्हें प्यारी
- फ्रांस की रहने वाली क्रिस्टेल येवान को हिंदी बहुत प्यारी है। साल 1994 में पहली बार भारत आई थीं। हिंदी से इतनी प्रभावित हुईं कि भाषा सीखी और अब फ्रांस में हिंदी पढ़ाती भी हैं।
- रूस की एलेसिया माकोवस्काया को भी हिंदी बहुत प्यारी है। धर्म, अहिंसा, आत्मा और बुद्धिमत्ता, इनके प्रिय शब्द हैं। मिंस्क में हिंदी का प्रचार-प्रसार कर रही हैं।
- फ्रांस की रहने वाली क्रिस्टेल येवान को हिंदी बहुत प्यारी है। साल 1994 में पहली बार भारत आई थीं। हिंदी से इतनी प्रभावित हुईं कि भाषा सीखी और अब फ्रांस में हिंदी पढ़ाती भी हैं।
- रूस की एलेसिया माकोवस्काया को भी हिंदी बहुत प्यारी है। धर्म, अहिंसा, आत्मा और बुद्धिमत्ता, इनके प्रिय शब्द हैं। मिंस्क में हिंदी का प्रचार-प्रसार कर रही हैं।