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मॉडल बन मां-बाप का नाम रोशन करना चाहती थी संजलि, बिटिया की मौत के साथ टूटे सपने

Fri, 21 Dec 2018 01:03 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 21 Dec 2018 01:03 PM IST
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छात्रा संजलि का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
वो मां-बाप की दुलारी थी। उनकी जान से प्यारी थी। उनका सपना थी। बेटे से बढ़कर थी। आगरा के गांव लालऊ की रहने वाली छात्रा संजलि की मौत के साथ सब टूट गया। बस उसकी यादें ही घर में रह गई हैं। परिजनों के आंसू नहीं रुक रहे हैं। हर कोई यह कह रहा है कि आखिर उसने किसी का क्या बिगाड़ा था, जो उसे इस तरह मौत की आग में झोंक दिया गया।

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संजलि - फोटो : अमर उजाला
परिवार के लोगों ने बताया कि संजलि पढ़ाई में तेज थी। वो गांव की और लड़कियों से कुछ अलग करके दिखाना चाहती थी। पहले ओम आदर्श विद्यालय में पढ़ती थी। 9वीं कक्षा में एसएस स्कूल में प्रवेश ले लिया। उसकी सहेलियों ने जहां कला वर्ग चुना, उसने गणित वर्ग लिया। इसमें वो प्रथम स्थान पर रही।

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संजलि - फोटो : अमर उजाला
हाल ही में संजलि ने एक कोचिंग की प्रतियोगिता में भाग लिया। जिसमें उसे प्रथम पुरस्कार भी मिला। उसे इनाम में ट्राफी और साइकिल मिली। बड़ी बहन अंजलि ने बताया कि संजलि मॉडल बनना चाहती थी, जिससे टीवी पर आकर अपने मां-बाप और गांव का नाम रोशन कर सके। मगर, उसकी मौत के साथ सब कुछ टूट गया। पिता ने उसके लिए बड़े सपने देख रखे थे, जो कि अब कभी पूरे नहीं होंगे। अब संजलि की यादें ही दिल में बसी रहेंगी।
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संजलि का घर - फोटो : अमर उजाला
गांव लालऊ में बने घर में तीन सीढ़ी चढ़कर संजलि का कमरा है। इसी में उसकी बड़ी बहन अंजलि और छोटे भाई-बहन रहते हैं। पहली मंजिल पर कमरा बना है, उसमें मां और पिता सोते हैं। संजलि के कमरे में एक तरफ लकड़ी की अलमारी रखी है, जिसमें उसकी किताबें रखी हैं। दूसरी तरफ दीवार में बनी अलमारी में ट्राफी और प्रमाणपत्र रखा है। बड़ी बहन अंजलि बार-बार इन्हें देखती है और रोने लगती है। वह अब एक ही बात कह रही है कि बहन की बस अब यही यादें रह गई हैं।
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रोते बिलखते संजलि के परिजन - फोटो : अमर उजाला
संजलि के पिता हरेंद्र जूता कारीगर हैं। उनके पांच बच्चे थे। इनमें बड़ी बेटी अंजलि बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा है। वहीं संजलि दसवीं की पढ़ाई कर रही थी। 13 साल का बेटा प्रवीन कक्षा सात, सात साल की बेटी प्रग्या कक्षा दो और चार साल का गरुण केजी में पढ़ते हैं। वह गांव के विद्यालय में पढ़ने जाते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इसके बावजूद पिता बच्चों को पढ़ाने में लगे हुए थे। 
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