उत्तर प्रदेश के आगरा में मंगलवार को 'मां तुझे प्रणाम' के तहत आयोजित वीरांगना सम्मान समारोह आयोजित किया गया। सरहद पर देश की आन, बान और शान के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों के अदम्य पराक्रम की शौर्य गाथाएं। बलिदानियों के पराक्रम को सुनकर गूंजते वीर सपूतों के जयकारे। ...और वीर नारियों के त्याग, संघर्ष गाथा को सुनकर आंखों से झर-झर बहते आंसू। समारोह में ऐसा ही नजारा दिखा।
सिकंदरा स्थित डॉ. एमपीएस वर्ल्ड स्कूल में आयोजित अमर उजाला के अभिनव अभियान ‘मां तुझे प्रणाम’ के तहत वीरांगना सम्मान समारोह में सरहद पर शहीद हुए सैनिकों की वीर माताओं, वीर नारियों व अन्य परिजन का अभिनंदन किया गया। मुख्य अतिथि एयर कमोडोर, वायु सेना मेडल से सम्मानित, सतीश कुमार गुप्ता के साथ विशिष्ट अतिथियों ने वीर नारियों को सम्मानित किया।
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मां तुझे प्रणाम: शौर्य का हुआ सम्मान... हर आंख हुई नम
- फोटो : संवाद
मंच पर जब वीर नारियों की संघर्ष गाथा और शहीद की शौर्य गाथा बयां की जाती तो आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ता। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच सम्मान का सिलसिला चला तो वीर नारियों का अभिनंदन करने वाले खुद ही मंच से नीचे आ गए और बुजुर्ग वीर नारियों का उनके पास जाकर सम्मान किया।
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7 युद्ध नायकों को दिया सम्मान
वीरांगना सम्मान समारोह में पहली बार युद्ध नायकों को भी सम्मानित किया गया। चीन और पाकिस्तान के साथ युद्ध लड़ चुके जांबाज सैन्य अफसरों को एयर कमोडोर सतीश कुमार गुप्ता ने सम्मानित किया। इनमें रिटायर्ड मेजर जनरल प्रताप दयाल सिंह, कर्नल सीके सिंह, कर्नल रणवीर सिंह सोढ़ी, कर्नल राजेंद्र सिंह, कर्नल जीएम खान और लेफ्टिनेंट जनरल राजेश कुमार का अभिनंदन किया गया।
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सम्मान समारोह का इन्होंने किया उद्घाटन
वीरांगना सम्मान समारोह का उद्घाटन पुलिस महानिरीक्षक दीपक कुमार, आगरा एयरफोर्स स्टेशन के एयर कमोडोर सतीश कुमार गुप्ता, एफमेक अध्यक्ष पूरन डावर, डॉ. एमपीएस ग्रुप के चेयरमैन स्क्वाड्रन लीडर (रि) एके सिंह, कर्नल जीएम खान, कुंवर दिनेश प्रताप सिंह ने दीप जलाकर किया।
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बाहर बारिश, अंदर आंखों में नीर
अमर उजाला के वीरांगना सम्मान समारोह के साथ इस बार भी ऐसा संयोग रहा कि समारोह से पहले बारिश शुरू हो गई, लेकिन हर बार की तरह न वीर नारियों के कदम थमे, न ही उनके सम्मान में आ रहे शहरवासियों के। जिस समय मंच पर शौर्य गाथाओं को याद कर वीर नारियों को अभिनंदन किया जा रहा था, तब बाहर बारिश हो रही थी और अंदर हॉल में बैठे लोगों की आंखें आंसुओं से भीगी हुई थीं।