आगरा के केंद्रीय हिंदी संस्थान में शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब संस्थान के खेल मैदान में आठ फीट लंबा अजगर पहुंच गया। सूचना पर वाइल्डलाइफ एसओएस की रैपिड रिस्पांस यूनिट ने अजगर को पकड़ा। कुछ घंटों के लिए निगरानी में रखने के बाद सांप को जंगल में छोड़ दिया गया।
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केंद्रीय हिंदी संस्थान के खेल मैदान में पहुंचा आठ फीट लंबा अजगर, मच गया हड़कंप
Sat, 08 Aug 2020 06:04 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 08 Aug 2020 06:04 PM IST
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वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम ने पकड़ा अजगर
- फोटो : Wildlife SOS
वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम ने पकड़ा अजगर
- फोटो : Wildlife SOS
केंद्रीय हिंदी संस्थान के छात्रावास (हॉस्टल) के पास खेल मैदान है। यहां रहने वाले कुछ छात्रों ने शाम के वक्त मैदान में अजगर देखा। अजगर आने की सूचना छात्रावास में हड़कंप मच गया। छात्रों ने तुरंत आपातकालीन हेल्पलाइन 9917109666 पर फोन कर वाइल्डलाइफ एसओएस को सूचना दी।
अजगर
- फोटो : Wildlife SOS
'इतना बड़ा सांप पहली बार देखा'
संस्था की रैपिड रिस्पांस यूनिट मौके पर पहुंच गई। तब तक अजगर हॉस्टल के गेट की ओर बढ़ चुका था। टीम ने सावधानीपूर्वक अजगर को पकड़ा और बाद में जंगल में छोड़ दिया। संस्थान के छात्र प्रीतम सिंह बिष्ट ने कहा कि हमें पहले भी परिसर में सांप दिखे हैं, लेकिन यह पहली बार है जब हमने इतने बड़े अजगर को देखा है।
संस्था की रैपिड रिस्पांस यूनिट मौके पर पहुंच गई। तब तक अजगर हॉस्टल के गेट की ओर बढ़ चुका था। टीम ने सावधानीपूर्वक अजगर को पकड़ा और बाद में जंगल में छोड़ दिया। संस्थान के छात्र प्रीतम सिंह बिष्ट ने कहा कि हमें पहले भी परिसर में सांप दिखे हैं, लेकिन यह पहली बार है जब हमने इतने बड़े अजगर को देखा है।
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जंगल में छोड़ा अजगर
- फोटो : Wildlife SOS
इंडियन रॉक पाइथन प्रजाति का है अजगर
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि केंद्रीय हिंदी संस्थान से पकड़ा गया अजगर इंडियन रॉक पाइथन है। इनकी लंबाई 20 फीट तक हो सकती है। ये सांप भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण पूर्व एशिया के क्षेत्रों में पाए जाते हैं। अजगर की यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची के तहत संरक्षित है। इनके आयात या निर्यात पर पूर्णतः प्रतिबंध भी लगा हुआ है।
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि केंद्रीय हिंदी संस्थान से पकड़ा गया अजगर इंडियन रॉक पाइथन है। इनकी लंबाई 20 फीट तक हो सकती है। ये सांप भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण पूर्व एशिया के क्षेत्रों में पाए जाते हैं। अजगर की यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची के तहत संरक्षित है। इनके आयात या निर्यात पर पूर्णतः प्रतिबंध भी लगा हुआ है।
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अजगर
- फोटो : अमर उजाला
सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि अजगर का बड़ा आकार ही लोगों के मन में घबराहट और डर पैदा करने के लिए काफी है। ऐसी परिस्थिति में एक प्रशिक्षित सांप हैंडलर द्वारा बचाव अभियान का संचालन करना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों की एक टीम ने सावधानीपूर्वक अजगर को पकड़ लिया। इसके बाद उसे जंगल में छोड़ दिया गया है।