शहर में सप्लाई के लिए अलग-अलग हिस्सों में बने गंगाजल के भूमिगत टैंक पर कुत्तों और बंदरों का डेरा है। दस साल से रकाबगंज, शाहगंज और नौलक्खा पंपिंग स्टेशन के क्लीयर वाटर रिजर्वायर (सीडब्ल्यूआर) पर छतें नहीं हैं।
पढ़िए पूरी रिपोर्ट...
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गंगाजल के भूमिगत टैंक पर कुत्तों और बंदरों का डेरा
- फोटो : अमर उजाला
अस्थायी तौर पर पानी ढकने के लिए तिरपाल लगाए गए, लेकिन वह फट चुके हैं और बल्लियां गल चुकी हैं। खुले आसमान के नीचे और आवारा पशुओं के घूमने से भूमिगत टैंकों में भरा गंगाजल दूषित होने की आशंका है।
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पानी ढकने के लिए लगाए गए तिरपाल
- फोटो : अमर उजाला
जीवनी मंडी और सिकंदरा वाटर वर्क्स से हो रही गंगाजल की आपूर्ति में पहली बार सीडब्ल्यूआर का तल नजर आया है। बेहद साफ पानी इन टैंकों में भरा है, लेकिन टैंकों की दीवारों की सफाई नहीं कराई गई।
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टैंकों की दीवारों की सफाई नहीं कराई गई
- फोटो : अमर उजाला
भूमिगत टैंकों के नजदीक झाड़ियां हैं और लिंटर टूट चुके हैं। गले हुए सरिया बाहर निकले हैं। गंगाजल आने से पीला, काला और बदबूदार पानी तो अब बंद हुआ है लेकिन टैंकों की दीवारों की सफाई नहीं कराई गई।
मेयर नवीन जैन ने रकाबगंज, नौलक्खा और शाहगंज में क्लीयर वाटर रिजर्वायर (सीडब्ल्यूआर) की बदहाल स्थिति पर कहा कि जलकल अधिकारियों के साथ वह शुक्रवार को बात करेंगे और हर सीडब्ल्यूआर में सुरक्षा के इंतजाम करने, ढकने का काम तुरंत शुरू करने के निर्देश देंगे। यह वाकई चिंताजनक स्थिति है। जो जिम्मेदार अधिकारी हैं, उनसे जवाब तलब किया जाएगा।
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