ब्रज में डेंगू व बुखार का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार को फिरोजाबाद में पांच लोगों की डेंगू व बुखार से मौत हो गई। मैनपुरी में पांच साल की बालिका की व कासगंज व आगरा में दो-दो लोगों की मौत हो गई। फिरोजाबाद के सती नगर निवासी अंशू (01) पुत्र अजय राठौर की बुखार से मौत हो गई। तनिष्का (12) पुत्री राहुल निवासी टापा कला की आगरा में इलाज के दौरान, सरकुलर रोड निवासी अभिषेक (12) पुत्र आनंद जैन की दिल्ली में, चेतन (11) पुत्र सिपाही राम निवासी गांव कुर्री थाना लाइनपार व गांधी नगर निवासी ओम पाराशर (12) पुत्र राहुल पाराशर की बुखार से मौत हो गई। मैनपुरी कोतवाली थाना क्षेत्र के ब्योंती खुर्द निवासी राजू की पांच साल की पुत्री खुशबू की बुखार से मौत हो गई। कासगंज में गनेशपुर निवासी शबनूर (26) पुत्री कदीर व कादरगंज पुख्ता निवासी कुसमा (14) पुत्री एवरन सिंह की बुखार से मौत हो गई।
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ब्रज में बुखार का प्रकोप: डेंगू व वायरल से 10 लोगों की मौत, फिरोजाबाद में पांच ने तोड़ा दम
Mon, 20 Sep 2021 07:31 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 20 Sep 2021 07:31 AM IST
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फिरोजाबाद के अस्पताल में मरीज
- फोटो : अमर उजाला
मृतक छोटू का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
आगरा के बाह क्षेत्र में नीमडाडा गांव में रविवार की सुबह भूपेंद्र सिंह के आठ माह के बेटे आरव की बुखार से मौत हो गई। पत्नी कल्पना ने बताया कि फरैरा के झोलाछाप से बेटे का तीन दिन से इलाज चल रहा था। मृतक प्रधान जगवीर सिंह का भतीजा था। वहीं पिनाहट के खिरकिया मोहल्ला निवासी पूर्व प्रधान रवि पांडेय के 14 वर्षीय बेटे छोटू की बुखार से जान चली गई। बुखार से पिनाहट क्षेत्र में अब तक तीन की मौत हो चुकी है। इसमें 11 सितंबर को वीकेश (13) निवासी भावनाथ की ढारि, 17 सितंबर को गायत्री (9 माह) पुत्री सतीश निवासी सूबेदार पुरा और छोटू (14) पुत्र रवि पांडेय शामिल हैं।
फिरोजाबाद में दवा लेते मरीज
- फोटो : अमर उजाला
सौ शैय्या अस्पताल में 24 घंटे में 248 मरीजों को किया डिस्चार्ज
फिरोजाबाद सौ शैय्या अस्पताल में सरकारी आंकड़ों में डेंगू और वायरल के मरीजों की संख्या घटने लगी हैं। लेकिन निजी अस्पतालों में वायरल और डेंगू के मरीजों की सुबह से देर शाम तक कतारें लगी हैं। निजी अस्पतालों में मरीजों के भर्ती होने के लिए जगह नहीं है। शासन से आई टीम के दौरे के बाद मरीजों को अस्पताल से जल्द से जल्द डिस्चार्ज किया जा रहा है। ठीक हो चुके मरीजों को दीदामई और दबरई स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती किया जा रहा है। रविवार को सौ शैय्या अस्पताल में कुल 297 ही मरीज रह गए हैं। 24 घंटे में 248 मरीजों को सौ शैय्या अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। 154 मरीज भर्ती किए गए हैं।
फिरोजाबाद सौ शैय्या अस्पताल में सरकारी आंकड़ों में डेंगू और वायरल के मरीजों की संख्या घटने लगी हैं। लेकिन निजी अस्पतालों में वायरल और डेंगू के मरीजों की सुबह से देर शाम तक कतारें लगी हैं। निजी अस्पतालों में मरीजों के भर्ती होने के लिए जगह नहीं है। शासन से आई टीम के दौरे के बाद मरीजों को अस्पताल से जल्द से जल्द डिस्चार्ज किया जा रहा है। ठीक हो चुके मरीजों को दीदामई और दबरई स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती किया जा रहा है। रविवार को सौ शैय्या अस्पताल में कुल 297 ही मरीज रह गए हैं। 24 घंटे में 248 मरीजों को सौ शैय्या अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। 154 मरीज भर्ती किए गए हैं।
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सौ शैय्या अस्पताल फिरोजाबाद
- फोटो : अमर उजाला
सौ शैय्या अस्पताल और नवनिर्मित बिल्डिंग में 48 घंटे पूर्व 504 मरीज भर्ती थे। अब मरीजों की संख्या तेजी से घटी है। हालांकि डिस्चार्ज किए गए कई मरीजों के तीमारदारों का आरोप है कि उनके बच्चे को दर्द है। बुखार भी कम नहीं हुआ। इसके बाद भी मरीज को अन्य स्वास्थ्य केंद्र पर रेफर कर दिया है। सामान्य स्थिति में आए मरीजों को दीदामई स्वास्थ्य केंद्र पर एंबुलेंस से भेजा गया। गंभीर मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों और क्लीनिक की बात करें तो स्थिति पहले की तरह ही बनीं हुई है। गंभीर मरीजों को सीधे आगरा रेफर किया जा रहा है। यहां तक कि दो दिन बाद नंबर आ रहा है।
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फिरोजाबाद: सौ शैय्या अस्पताल के बाहर भीड़
- फोटो : अमर उजाला
रिपोर्ट आने का इंतजाम कर रहे मरीज
बदन तपने के बाद भी सौ शैय्या अस्पताल में चिकित्सक मरीजों को भर्ती नहीं कर रहे हैं। परिजन भले ही जमीन पर बच्चों को लिटाए रहते हैं। इसके बाद भी मरीजों को भर्ती नहीं किया जाता है। चिकित्सक रिपोर्ट आने की बात कह कर टाल देते हैं। रिपोर्ट आने में करीब आठ से दस घंटे लगते है। तब तक मरीज परेशान रहता है। या फिर तीमारदार उसे निजी अस्पताल में ले जाते हैं।
सौ शैय्या से मरीजों की संख्या में तेजी से कमी आई है। उन मरीजों को डिस्चार्ज किया है, जो ठीक हो चुके हैं। डा. संगीता अनेजा, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
बदन तपने के बाद भी सौ शैय्या अस्पताल में चिकित्सक मरीजों को भर्ती नहीं कर रहे हैं। परिजन भले ही जमीन पर बच्चों को लिटाए रहते हैं। इसके बाद भी मरीजों को भर्ती नहीं किया जाता है। चिकित्सक रिपोर्ट आने की बात कह कर टाल देते हैं। रिपोर्ट आने में करीब आठ से दस घंटे लगते है। तब तक मरीज परेशान रहता है। या फिर तीमारदार उसे निजी अस्पताल में ले जाते हैं।
सौ शैय्या से मरीजों की संख्या में तेजी से कमी आई है। उन मरीजों को डिस्चार्ज किया है, जो ठीक हो चुके हैं। डा. संगीता अनेजा, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज