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जब ग्रेग चैपल ने कहा था दीपक, तुम क्रिकेटर बनने लायक नहीं, अब रचा इतिहास
Tue, 12 Nov 2019 10:18 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 12 Nov 2019 10:18 AM IST
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दीपक चाहर
- फोटो : सोशल मीडिया
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क्रिकेट की दुनिया में ताज नगरी का नाम ताज की तरह रोशन कर रहे स्विंग के सुल्तान दीपक चाहर को रिकार्ड बनाने की आदत है। उन्हें प्रथम श्रेणी के अपने पहले ही मैच में आठ विकेट लिए थे। यह उपलब्धि इसलिए खास थी, क्योंकि दो साल पहले ही ग्रेग चैपल ने उनसे कहा था, तुम क्रिकेटर बनने लायक नहीं हो। अब दीपक ने टी-20 नया इतिहास रचा है तो उनके किस्से लोगों को याद आ रहे हैं।
क्रिकेटर दीपक चाहर
- फोटो : Facebook/Deepak Chahar
बात 2008 की है। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन खिलाड़ियों के ट्रायल ले रहा था। एक से बढ़कर एक बल्लेबाज और गेंदबाज आए थे। 16 साल का एक लड़का चुपचाप खड़ा था। यही दीपक चाहर था। नंबर आया तो बालिंग करके दिखाई। स्विंग थी, रफ्तार थी, लय भी थी, लेकिन टेस्ट ले रहे चैपल को कुछ जमा नहीं। ग्रेग चैपल राजस्थान क्रिकेट एकेडमी के निदेशक थे। सलेक्शन उन्हें ही करना था। दीपक को टॉप-50 में भी नहीं चुना।
क्रिकेटर दीपक चाहर
- फोटो : अमर उजाला
दीपक ने पूछ लिया? मुझमें क्या कमी है? जवाब मिला, मुझे नहीं लगता, आप उच्च स्तर तक क्रिकेट खेल सकते हैं, आपमें क्रिकेटरों वाली बात नहीं है। जवाब दिल तोड़ने वाला था लेकिन दीपक ने खुद को संभाला। उनके पिता लोकेंद्र चाहर इस किस्से को सुनाते हैं। वह बताते हैं कि दीपक टूटा नहीं, और मजबूत हुआ। वहां से लौटा, लगातार मेहनत की और फिर मैदान पर आया। इस बार तैयारी और जोरदार थी। उसने आठ विकेट लिए थे।
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दीपक चाहर
यह किस्सा नवंबर, 2010 का है। दीपक की उम्र अब 18 साल हो चुकी थी। वह मेहनत और प्रदर्शन के बल पर राजस्थान की रणजी टीम का हिस्सा बन चुका था। पहला मैच था। दीपक ने बॉल थामी, दौड़ लगाई, निगाहें स्टंप पर थीं। बस फिर क्या था। पहला विकेट... दूसरा विकेट... तीसरा विकेट... झड़ी लग गई थी। आठ विकेट चटकाए दीपक ने। 7.3 ओवर डाले थे। इनमें भी दो मेडन थे। रन दिए थे सिर्फ दस। 78 मिनट में हैदराबाद की पूरी टीम पेवेलियन में थी। इतिहास बन चुका था। रणजी में किसी टीम का यह न्यूनतम स्कोर था।
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दीपक चाहर
चोटों ने रोका रास्ता, पर आगे बढ़ते गए दीपक
2010 में धमाकेदार एंट्री करने वाले दीपक का रास्ता शरीर की चोटों और बीमारियों ने भी रोका लेकिन वह हौंसला नहीं हारे, आगे बढ़ते गए। 2011-12 में रणजी के छह मैच ही खेल पाए, पीलिया ने जकड़ लिया, तीन महीने बिस्तर पर रहे, गेंदबाजी की रफ्तार 140 किमी. प्रति घंटा से घटकर 120 रह गई थी। 2012-13 में चोट लगी, आधे से ज्यादा मैच खेल ही नहीं पाए। परेशानी आई लेकिन फोकस खेल पर ही रखा। 2013-14 में रणजी के पहले ही मैच में हाथ में चोट लग गई। इससे उबरने में वक्त लगा।
2010 में धमाकेदार एंट्री करने वाले दीपक का रास्ता शरीर की चोटों और बीमारियों ने भी रोका लेकिन वह हौंसला नहीं हारे, आगे बढ़ते गए। 2011-12 में रणजी के छह मैच ही खेल पाए, पीलिया ने जकड़ लिया, तीन महीने बिस्तर पर रहे, गेंदबाजी की रफ्तार 140 किमी. प्रति घंटा से घटकर 120 रह गई थी। 2012-13 में चोट लगी, आधे से ज्यादा मैच खेल ही नहीं पाए। परेशानी आई लेकिन फोकस खेल पर ही रखा। 2013-14 में रणजी के पहले ही मैच में हाथ में चोट लग गई। इससे उबरने में वक्त लगा।