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Agra: चंबल का पानी उतरा तो दिखा तबाही का मंजर, उजड़े खेत-खलिहान, ढूंढे नहीं मिल रहे कच्चे मकान

Mon, 29 Aug 2022 10:10 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 29 Aug 2022 10:10 AM IST
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crops ruined and many houses collapsed due to chambal floods in agra
बाढ़ का पानी उतरने के बाद दिखा तबाही का मंजर - फोटो : अमर उजाला

आगरा के बाह और पिनाहट क्षेत्र में चंबल का पानी उतर रहा है तो बाढ़ से प्रभावित गांवों में तबाही के निशान साफ नजर आ रहे हैं। खेत-खलिहान उजड़ गए हैं। बाढ़ में डूबे कच्चे मकान ढूंढे नहीं मिल रहे। कई परिवारों से छत छिन गई है। पिछले 24 घंटे में चंबल खतरे के निशान से नीचे उतर आई है। जलस्तर आठ मीटर घटकर 124 मीटर रह गया है, फिर भी 10 गांवों का संपर्क दोबारा नहीं जुड़ सका है। 18 गांवों में पांच दिन से बिजली नहीं है। 



बाढ़ प्रभावित इलाकों में रास्ते कीचड़ व दलदल में बदल गए हैं। गुढ़ा, रानीपुरा, भटपुरा, मऊ की मढै़या, झरनापुरा, रेहा, डगोरा, कछियारा के रास्ते पर पानी और गोहरा, भगवानपुरा गांवों में रास्तों पर कीचड़ भरा है। पांचवें दिन भी इन गांवों का मुख्यालय से संपर्क टूटा रहा। बाढ़ में घर खेत डूबने पर 20 गांवों के पांच हजार से अधिक लोग अभी बीहड़ के टीलों पर शरण लिए हुए हैं। 

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उमरैठापुरा में बाढ़ के कारण गिरा मकान - फोटो : अमर उजाला
रविवार को गांव पहुंचे उमरैठापुरा के लंबर, जनवेद, छोटेलाल, सुशील, होशियार, राममूर्ति, गनपति, मेदीराम, साहूकार, तहसीलदार आदि ने बताया कि उनके घर का नामोनिशान नहीं बचा है। चारे की मशीन और सामान भी मलबे में दबे हैं। यहां करीब 40 मकान बाढ़ की भेंट चढ़ गए हैं। 
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बाढ़ में गिरा कच्चा मकान - फोटो : अमर उजाला
टीले से गांव पहुंचे गुढ़ा के मोहन सिंह, टिल्लू, विधीराम, रामनरेश  दुलारे, भागीरथ, हजूरी आदि को गांव में अपने घर मलबे के ढेर में तब्दील मिले। गोहरा के जयराम, योगेश, दशरथ, राजू, महावीर आदि के मकान बाढ़ में ढह गए। 20 से अधिक झोपड़ियां बाढ़ में बह गईं। भगवानपुरा के मुन्नालाल, रामवीर, हरिओर, अनार सिंह, विद्याराम आदि के घर भी बाढ़ की जद में आए हैं। 
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ग्रामीणों को स्टीमर से निकाला गया (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
गुढ़ा, झरनापुरा, भगवानपुरा, खेड़ा राठौर में चल रहे स्टीमर व नाव रविवार को बंद कर दिए गए हैं। गांव वालों का कहना है कि कीचड़ व दलदल हटे तो गांव लौटें। बाढ़ प्रभावित 18 गांव पांचवें दिन अंधेरे में डूबे रहे। अधिशासी अभियंता देवेंद्र प्रताप वर्मा ने बताया कि रास्ते साफ न होने की वजह से लाइनें दुरुस्त नहीं हो सकीं हैं। गांव में कैद में परिवारों तक सरकारी रसद नहीं पहुंच पा रही है। एसडीएम बाह रतन वर्मा ने बताया कि रास्तों से पानी हट रहा है। कीचड़ और दलदल की सफाई कराई जा रही है। 
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बाढ़ में डूबी फसल - फोटो : अमर उजाला
चंबल की बाढ़ से बाह के 38 गांवों की 30 हजार हेक्टेयर में बाजरा, तिल, भिंडी, तोरई, मिर्च आदि की फसलें नष्ट हो गईं हैं। डूबी और खेतों में बिछी फसलों को देखकर किसानों के आंसू आ रहे हैं। सिमराई के प्रधान जयवीर सिंह ने बताया कि उनकी पंचायत के गुढ़ा, सिमराई, रानीपुरा, भटपुरा में 250 हेक्टेयर से ज्यादा रकबे में फसलें डूबी हैं।
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