झांसी से 12 जुलाई को अगवा किए गए सराफ राजेंद्र कुमार अग्रवाल (राजू कमरया) और उनके साथी राहुल अग्रवाल उर्फ राहुल छोले को आठ दिन से सिकंदरा के निखिल वुडलैंड अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 404 में रखा गया था। यहीं ये दोनों की बरामदगी हो जाने केबाद बुधवार दोपहर एसटीएफ के डीआईजी मनोज तिवारी ने खुलासे की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि बदमाशों ने 25 करोड़ फिरौती मांगी थी। अपहृत कारोबारियों को सादाबाद, मथुरा के मांट, आगरा के सैया में रखा गया। इसके बाद 17 जुलाई को निखिल अपार्टमेंट में शिफ्ट कर दिया गया। इसके लिए फ्लैट किराए पर लिया गया था। एसटीएफ एक भी बदमाश को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। उनकी तलाश की जा रही है।
दोनों कारोबारियों को मंगलवार रात करीब नौ बजे आगरा के सिकंदरा के निखिल वुडलैंड अपार्टमेंट में हुई मुठभेड़ के बाद मुक्त करा लिया गया था। मनोज तिवारी ने बताया कि अपहरण में इस्तेमाल कार आगरा के सिकंदरा से लूटी गई थी। यह आगरा के ही अजीत जैन की है।
बदमाशों ने इसकी नंबर प्लेट बदल दी थी। अपहरण करते समय चार बदमाश थे। सादाबाद का रहने वाला विनोद जाट पुलिस का बर्खास्त सिपाही है। वह 2006 में भर्ती हुआ था। अपहरण केसमय वह कार में आगे बैठा था पुलिस की वर्दी पहनकर। इसके चलते चेकिंग में उसे रोका नहीं गया।
बदमाशों ने दोनों सराफ की आंखों पर पट्टी बांध रखी थी। राजेंद्र अग्रवाल के सिर पर तमंचा लगाकर मोबाइल से वीडियो रिकार्डिंग की गई। इसमें वह फिरौती देने के लिए अपने परिवार से कहते नजर आ रहे हैं।