आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएनएमसी) की जूनियर डॉक्टर योगिता गौतम की हत्या के मामले की सुनवाई परिजन आगरा से दिल्ली स्थानांतरित कराना चाहते हैं। वे दिल्ली में ही रहते हैं। उनका कहना है कि आगरा में सुनवाई हुई तो आने-जाने में जान का खतरा रहेगा। उन्होंने गुरुवार को आईजी रेंज ए. सतीश गणेश से मिलकर मुकदमा स्थानांतरित कराने के लिए प्रार्थनापत्र दिया, साथ ही इसकी प्रक्रिया भी जानी। वे इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे।
डॉक्टर योगिता हत्याकांड की सुनवाई दिल्ली में चाहते हैं परिजन, सुप्रीम कोर्ट में दायर करेंगे याचिका
आईजी रेंज ए. सतीश गणेश ने योगिता के परिजनों को बताया कि एक राज्य से दूसरे राज्य में किसी मामले की सुनवाई स्थानांतरित करना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। इसके लिए उन्हें अपनी परेशानी बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट आदेश देगा, तो सुनवाई स्थानांतरित हो जाएगी। पहले कई मामलों में ऐसा हो चुका है। इस पर उन्होंने कहा कि वे ऐसा ही करेंगे।
‘शातिर है विवेक, बचने के लिए कुछ भी करेगा’
डॉ. योगिता के पिता अंबेश गौतम ने आईजी को प्रार्थनापत्र में कहा है कि उनका परिवार शिवपुरी, पार्ट-2 दीनपुर नजफगढ़ नई दिल्ली में रहता है। वह किसी भी सूरत में हत्यारोपी डॉ. विवेक तिवारी को फांसी की सजा दिलाना चाहते हैं। विवेक तिवारी शातिर है। उसके पिता पुलिस में सीओ रहे थे। विवेक अपने बचाव के लिए कुछ भी करेगा। वह जेल में रहकर भी कुछ करा सकता है। उसके पास पैसों की कमी नहीं है। अंबेश गौतम के साथ उनका बेटा डॉक्टर मोहिंदर गौतम, पत्नी आशा गौतम और एक रिश्तेदार आया था।
डॉ. योगिता के हाथों में मिले बालों की जांच लखनऊ में होगी
सीओ (क्षेत्राधिकारी) कोतवाली चमन सिंह चावड़ा ने आईजी रेंज को जांच में अब तक की प्रगति बताई। मौका-ए-वारदात की मिट्टी, पैरों के निशान और हत्या में इस्तेमाल रिवॉल्वर की जांच आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला में होगी। डॉ. योगिता के हाथ में मिले विवेक के बाल और नाखूनों में मिली खुरचन लखनऊ विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेज दी गई है। इनकी डीएनए जांच भी होगी। विवेक तिवारी का नमूना लिया जाएगा। इस प्रक्रिया में तीन महीने तक का समय लग सकता है।
पुलिस कि अनुसार पिछले दिनों विवेक की मां, भाई और एक अन्य रिश्तेदार उससे जेल में मिलने आए थे। जेल के गेट के बाहर से ही परिजनों ने विवेक से बातचीत की थी। उस समय वह भावुक हो गया था। यह बोल रहा था कि यहां से कैसे भी बाहर निकालो।