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लॉकडाउनः वृद्घाश्रम में दंपती का छलका दर्द, फफकते हुए बोले, तुम्हारी याद आ रही बेटा, घर पर ही रहना
Mon, 13 Apr 2020 12:03 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 13 Apr 2020 12:03 AM IST
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रामलाल वृद्ध आश्रम में फफकते महेश चंद्र अग्रवाल उन्हें सहारा देतीं पत्नी
- फोटो : अमर उजाला
उस बुजुर्ग की आंखों में आंसुओं का सैलाब था। फफकते, फफकते उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा कि बेटा, यदू। तुम लॉकडाउन का पूरी तरह पालन करना। घर से बाहर नहीं निकलना। पापा की हर बात मानना। इसके बाद पिछले तीन महीने से रामलाल वृद्धाश्रम में अपनी पत्नी मीना अग्रवाल के साथ रह रहे महेश चंद अग्रवाल का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
रामलाल वृद्ध आश्रम
- फोटो : अमर उजाला
रामलाल वृद्ध आश्रम में हर बुजुर्ग दंपती का इन दिनों यही हाल है। घर से बेघर कर दिए गए उम्र दराज लोगों की आंखें रोजाना नम हो रही हैं। आश्रम में रह रहे वृद्ध अपने नातियों को यह संदेश देना चाहते हैं कि लॉकडॉउन का पूरी तरह से पालन करें। घर से बाहर नहीं निकलें। इन सभी बुजुर्गों का दर्द सिर्फ यह है कि उनके दिल की कोई बात उनके नाती तक पहुंचा दे। बेटा और बहू फोन नहीं उठाते हैं।
रामलाल वृद्ध आश्रम में महेश चंद्र अग्रवाल, सहारा देतीं पत्नी
- फोटो : अमर उजाला
महेश चंद्र अग्रवाल का कहना है कि इस बात का गम नहीं है कि हमें यहां रहना पड़ रहा है। कभी-कभी घर की याद आती है। मैं और मेरी पत्नी मीना कमरे में रो लेते हैं। हम दोनों एक-दूसरे को तसल्ली देते हैं। बस कोरोना वायरस के खिलाफ चल रही लड़ाई में अपने नाती से फोन पर सिर्फ यह कहना चाहता था कि लॉकडॉउन का पालन करें।
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रामलाल वृद्धाश्रम की गोशाला में गाय
- फोटो : अमर उजाला
रामलाल वृद्धाश्रम की गोशाला में 350 गायों को हर रोज सुबह और शाम भूसा व चोकर दिया जाता है। लॉकडॉउन के कारण इन गायों का एक दिन का दाना पानी बचा है। सदस्य विनय शर्मा का कहना है कि पिछले कई सालों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब गायों के लिए एक दिन का ही भूसा और चोकर बचा है। इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ।
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रामलाल वृद्ध आश्रम के अध्यक्ष शिव प्रसाद शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
रामलाल वृद्ध आश्रम के अध्यक्ष शिव प्रसाद शर्मा ने जिलाधिकारी को पत्र लिखा है कि लॉकडॉउन समाप्त होने तक प्रशासन आश्रम की सैनिटाइज रसोई का उपयोग कर सकता है। उन्होंने कहा कि आश्रम में तीन घंटे में तीन हजार लोगों का भोजन तैयार किया जा सकता है।