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वृंदावनः ठाकुर बांकेबिहारीजी इस बार फूलबंगले में नहीं विराजेंगे, कोरोना ने तोड़ी परंपरा

Sat, 04 Apr 2020 12:09 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Published by: Abhishek Saxena Updated Sat, 04 Apr 2020 12:09 AM IST
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Banke Bihari Ji Will Not Sit At Phool Bangla From Ekadashi
प्रदर्शनी में बांकेबिहारी का दरबार (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
सोनजुही, चमेली, गुलाब, गुलबांस, बेला की खुशबू के बीच मन को प्रफुल्लित करने वाले फूलबंगला में विराजने वाले भक्तों के आराध्य ठाकुर बांके बिहारी जी इस बार फूलबंगले में नहीं विराज सकेंगे। 

 
Banke Bihari Ji Will Not Sit At Phool Bangla From Ekadashi
बांकेबिहारी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
हर बार वह एकादशी से अपने गर्भगृह से निकलकर बाहर आकर भक्तों को फूलबंगला में दर्शन देते थे लेकिन इस बार कोरोना को लेकर लगाई गई बंदिशों के चलते न तो उनका फूलबंगला सज सकेगा और न ही वह बाहर आएंगे। इससे सैकड़ों वर्ष पुरानी मंदिर की परंपरा टूटेगी। 
Banke Bihari Ji Will Not Sit At Phool Bangla From Ekadashi
बांकेबिहारी महाराज के लिए सजाई गई सुखसेज (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
अपने लाडले ठाकुर की सेवा में लगे रहने वाले गोस्वामीगणों के अलावा भक्तगण भी इस परंपरा के टूटने से द्रवित हैं। स्वामी हरिदास जी के लाडले ठाकुर बांके बिहारी जी महाराज विगत सैकड़ों वर्षों से चैत्र की एकादशी से गर्भगृह से बाहर आकर दर्शन देते रहे हैं। इस दिन से भक्त आनंदित होकर उनके दर्शन चंदन चबूतरा पर करते हैं। 
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Banke Bihari Ji Will Not Sit At Phool Bangla From Ekadashi
बांकेबिहारी मंदिर में स्वर्ण रजत हिंडोला - फोटो : अमर उजाला
एकादशी से उनका सिंहासन चंदन चबूतरा पर रखा जाता है। उसके चारों और भव्य फूलबंगला सजाया जाता है। इतना ही नहीं ठाकुर जी की पोशाक में भी भक्तगणों द्वारा फूलों तक का प्रयोग किया जाता है। 
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Banke Bihari Ji Will Not Sit At Phool Bangla From Ekadashi
रथ पर सवार होकर निकले ठाकुर बांकेबिहारी महाराज(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
शयनकालीन सेवायत सुरेश गोस्वामी ने बताया कि इस दफा कोरोना के कारण न्यायालय के आदेश पर सेवा में सिर्फ चार-पांच गोस्वामीगण ही जा रहे हैं। इसलिए इस पुरातन परंपरा का निर्वाह नहीं हो पा रहा है। 
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