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अपराजिता: बच्चों का मोह छोड़ निभाई कोरोना वार्ड में ड्यूटी, संघर्ष भरी है नर्सों की कहानी

Mon, 17 Aug 2020 01:31 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 17 Aug 2020 01:31 AM IST
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Aparajita 100 Million Smiles story of corona warriors nurses
अपराजिता: कोरोना योद्धा नर्स - फोटो : अमर उजाला
आज आपको आगरा की उन नर्स के जज्बे से रूबरू कराते हैं, जिन्हें इस पेशे में आने के लिए संघर्ष का सामना करना पड़ा। किसी के पास फीस भरने के लिए पैसे नहीं थे तो किसी को परिवार की इजाजत नहीं मिल रही थी। लेकिन जब पेशे में आईं तो सेवा की मिसाल कायम की। एक नर्स ऐसी हैं जिन्होंने मरीजों की सेवा के लिए शादी नहीं की। एक ने बेटियों को सास-ससुर के पास छोड़ कोरोना वार्ड में ड्यूटी की है।
Aparajita 100 Million Smiles story of corona warriors nurses
अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स: स्टाफ नर्स नूतन सिंह - फोटो : अमर उजाला
पिता ने जीतोड़ मेहनत की, पढ़ाई रुकने नहीं दी- नूतन सिंह, स्टाफ नर्स, एसएन मेडिकल कॉलेज

नूतन सिंह एसएन मेडिकल कॉलेज में स्टाफ नर्स हैं। उन्होंने बताया कि वो छह बहनें हैं। घर में आटा चक्की चलाती थीं, तब कहीं खर्च चल पाता था। हालत यह थी कि फीस भरने के लिए पैसे नहीं थे, लेकिन पिताजी ने बहुत मेहनत की और पढ़ाई रुकने नहीं दी। नूतन बताती हैं कि जीजाजी बीएमएस चिकित्सक हैं, उन्होंने दीदी को नर्सिंग कोर्स कराया, उनकी जॉब लगी। दीदी से प्रेरित होकर सभी बहनों ने नर्सिंग को करियर चुना। 2009 में जॉब लगी। कोरोना मरीजों की ड्यूटी के वक्त दो छोटी बेटियों को सास-ससुर ने संभाला।
Aparajita 100 Million Smiles story of corona warriors nurses
अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स: स्टाफ नर्स गायत्री सारस्वत - फोटो : अमर उजाला
पैसे नहीं थे, शिक्षक ने फीस माफ कर दी- गायत्री सारस्वत, स्टाफ नर्स, जिला अस्पताल

गायत्री सारस्वत जिला अस्पताल में स्टाफ नर्स हैं। वो 35 साल से मरीजों की सेवा कर रही हैं। उन्होंने बताया कि पिताजी के पास थोड़ी सी खेती थी, पुरोहित का कार्य भी करते लेकिन दो भाई और तीन बहनों के बड़े परिवार को चलाना फिर भी मुश्किल था। कक्षा आठ के बाद पिताजी ने पढ़ाई बंद करा दी। पढ़ाई में होशियार थी तो शिक्षक ने पिताजी से कहा कि इसकी फीस नहीं लेंगे, बच्ची को पढ़ने दो। हाईस्कूल-इंटर और फिर नर्सिंग कोर्स किया। नर्स की नौकरी पर ताने मिले लेकिन सेवा का जज्बा लेकर आई थी, बरकरार रखा।
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अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स: स्टाफ नर्स रमा कुमारी - फोटो : अमर उजाला
मरीजों की सेवा के लिए शादी नहीं की- रमा कुमारी, स्टाफ नर्स, लेडी लॉयल

लेडी लॉयल (महिला जिला अस्पताल) की स्टाफ नर्स रमा कुमारी ने मरीजों की सेवा के लिए शादी नहीं की। उन्होंने कहा कि वो चार बहनें हैं। दादा के देहांत के बाद चार बेटियों के साथ हमारी चार बुआओं का जिम्मा भी पिता के कंधों पर आ गया। पढ़ाई के लिए फीस जुटाने को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता। परिवार की जिम्मेदारी संभाली। 1986 में नर्स की नौकरी लगी। यहां भी मरीज सेवा में जुटी रही। शादी के लिए परिवार और रिश्तेदारों ने कहा, लेकिन मना कर दिया। पूरा जीवन मरीजों की सेवा के लिए लगाने का प्रण लिया है।
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अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स: स्टाफ नर्स शालिनी जॉनसन - फोटो : अमर उजाला
विरासत में मिला मरीज सेवा का भाव- शालिनी जॉनसन, स्टाफ नर्स, एसएन मेडिकल कॉलेज

एसएन मेडिकल कॉलेज की स्टाफ नर्स शालिनी जॉनसन क्रिश्चियन परिवार से है। इस नाते मरीज सेवा का भाव विरासत में मिला। वो बताती हैं कि पिताजी फार्मासिस्ट थे, चर्च कंपाउंड में रहते थे, वहां और भी महिलाएं थी, जो नर्स थीं। उनकी पोशाक मुझे अच्छी लगती, जब उनके कार्यों के बारे में पता चला तो मन में सेवा भाव और जाग गया। 1983 में नौकरी लगी और तब से मरीज सेवा में लगी हूं। आज भी मरीज दवा लेने में कोताही करते हैं तो बड़ी बहन की तरह उनको डांटती भी हूं।
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