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'अपराजिता' के मंच पर बोलीं ताजनगरी की महिलाएं- अब न अत्याचार सहेंगे, न खामोश रहेंगे

Fri, 30 Nov 2018 01:11 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Updated Fri, 30 Nov 2018 01:11 PM IST
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amar ujala aparajita program over women empowerment in agra
अपराजिता कार्यक्रम में मौजूद महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
दस करोड़ महिलाओं के चेहरों पर मुस्कान लाने के लक्ष्य से शुरू की गई अमर उजाला की मुहिम अपराजिता के साथ आगरा से महिला और सामाजिक संगठन जुड़ गए हैं। महिला संगठनों की प्रतिनधियों ने अमर उजाला कार्यालय में गुरुवार को फोकस ग्रुप कार्यक्रम के तहत महिला अपराध विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि जमाना बदल रहा है, महिलाएं अबला नहीं रहीं, सबला हो रही है, अब न अत्याचार सहन करेंगी, न ही चुप रहेंगे। महिला अपराध रोकने के लिए उन्होंने सुझाव भी रखे।

'अपराजिता' के मंच पर बोलीं ताजनगरी की महिलाएं- अब न अत्याचार सहेंगे, न खामोश रहेंगे

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बबीता चौहान और नीलू धाकरे - फोटो : अमर उजाला
कोहिनूर क्लब की संस्थापिका बबीता चौहान ने कहा कि महिलाओं के प्रति अपराधों को रोकने के लिए घरों से ही संस्कार विकसित करने होंगे। मां की ज्यादा जिम्मेदारी है। जब मां ही सशक्त बनेगी तो बेटी भी उसे फालो करेगी। रोटरी क्लब ऑफ आगरा अध्यक्ष नीलू धाकरे ने कहा कि अब मीटू जैसे अभियान चल रहे हैं तो निश्चय ही महिलाओं को अपने साथ हुए दुर्व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाना आ गया है। टूटते संयुक्त परिवार और बढ़ते एकल परिवार भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। विधिक शिविर लगाकर कानूनों की जानकारी दी जानी चाहिए।

'अपराजिता' के मंच पर बोलीं ताजनगरी की महिलाएं- अब न अत्याचार सहेंगे, न खामोश रहेंगे

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रीना जाफरी और नूतन अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला
खिदमत वेलफेयर सोसाइटी की संस्थापिका रीना जाफरी ने कहा कि हम मलिन बस्तियों में भी इस मुहिम को शुरू करेंगे। मलिन बस्तियों में महिलाओं के प्रति अपराध ज्यादा होते हैं और वह अकसर खामोश रहती हैं। जबकि इसका विरोध करने की हिम्मत दिखानी होगी। लेखिका नूतन अग्रवाल ने कहा कि कई दफा समाज और परिवार में बिखराव की आशंका के कारण उनके कदम थम जाते हैं। इस डर को अपराजिता की मुहिम महिलाओं से दूर करने में सहायक सिद्ध होगी। 
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शबाना खंडेलवाल और हृदेय चौधरी - फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस नेत्री व समाजसेवी शबाना खंडेलवाल ने कहा कि महिलाओं के प्रति अपराधों को रोकने के लिए स्वयंसेवी व सामाजिक संगठनों से जुड़ी महिलाओं को एकजुट होना होगा। संगठनों को महिलाओं, बच्चियों के प्रति होने वाले किसी भी अपराध के मसले पर एकजुट होकर पैरवी करनी होगी। आराधना लेखिका मंच की संस्थापिका हृदेश चौधरी ने कहा कि अभिभावकों को बच्चियों को भी सजग करना होगा। आत्मरक्षा के प्रशिक्षण देने होंगे। हमारी संस्था अपराजिता की मुहिम को और आगे लेकर जाएगी। 
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अपराजिता कार्यक्रम में मौजूद महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
समाजसेवी शीतल अग्रवाल ने कहा कि आज भी लड़कियों और महिलाओं में अपनी समस्याओं को बताने में झिझक देखी जा रही है। इस झिझक और समाज के डर को उनके मन से दूर करना होगा, तब कुछ हद तक अपराधों में कमी आ सकेगी। अपराजिता की मुहिम का भी यही उद्देश्य है। माथुर वैश्य हरियाली महिला समिति की संस्थापिका दीप्ता गुप्ता ने कहा कि महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों के लिए एक मानसिकता जिम्मेदार है। इस मानसिकता को बदलने के लिए महिलाओं को काम करना होगा। महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं।
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