साल के सफर के दौरान अमर उजाला की हर खबर पर सबसे पहले पैनी नजर रही। आजादी के बाद देश के विभाजन से उपजे हालात की बात हो या कश्मीर पर हमला और उसका विभाजन, देश में किसी भी बड़ी घटना या उथलपुथल की हर खबर सबसे पहले पाठकों तक पहुंचाई गई। सत्यता और सटीकता की खासियत परंपरा बन गई है। 1948 के बाद से आज तक यह पैनी नजर संचार साधनों के विकल्प मिलने से और तीखी व तीव्र हो गई है। पद्मश्री डॉ. डीके हाजरा बोले, अमर उजाला से उनका 70 साल पहले नाता जुड़ा। अमर उजाला जिम्मेदार समाचार पत्र है और उसकी पत्रकारिता गंभीर है। सामाजिक सरोकार, जन समस्याओं को प्रमुखता से उठाने के साथ निष्पक्षता उसकी पहचान है। समय बदला, लेकिन इन 70 साल में मैंने अखबार के पैमाने बदलते नहीं देखे। स्वामीबाग निवासी 79 साल के पद्मश्री डॉ. हाजरा बोले कि मैं चिकित्सकीय क्षेत्र से जुड़ा हूं तो बीमारियों के प्रति ज्यादा सजग हूं।
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अमर उजाला स्थापना दिवस
- फोटो : स्पीड कलर लैब/ कलाकुंज
पद्मश्री डॉ. डीके हाजरा ने कहा कि मैंने अमर उजाला को अस्पतालों में सुधार और बिगड़ी जीवनशैली से होने वाली हृदय रोग, मोटापा, उच्च रक्तचाप, पक्षाघात, मधुमेह जैसी बीमारियों के प्रति खबरों के जरिये जागरूक करते देखा है, यह बेहद सराहनीय है। ये बीमारियां स्वस्थ भारत के लिए चुनौती साबित होंगी। कोरोना महामारी में अमर उजाला की पत्रकारिता और निखरी। कोरोना वायरस के प्रति जागरूक करने, टीकाकरण करवाने के लिए जो मुहिम चलाई, उसका लोगों पर असर भी पड़ा। मैं आशा करता हूं, अखबार ने जो 74 साल में पत्रकारिता में गौरवशाली मुकाम पाया है, वह एक दशक तक और बढ़े।
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अमर उजाला 75वां स्थापना दिवस
- फोटो : अमर उजाला
'अमर उजाला से मेरा पीढ़ियों का रिश्ता'
स्वतंत्रता सेनानी रानी सरोज गौरिहार ने कहा कि इस अखबार से मेरा पीढ़ियों का रिश्ता है। मैं 93 साल की हूं। मुझे याद है हम जब लखनऊ में रहते थे तब आगरा से वहां अखबार पहुंचता था। मेरे पिता पं. जगन प्रसाद रावत तब सरकार में मंत्री थे। उनके डोरीलाल जी से गहरे संबंध थे। जब भी आगरा आते डोरीलाल जी से मिलकर जाते। ये 1950 51 की बात होगी। 1974 तक मेरे पिता मंत्री रहे। वह आगरा के खेरागढ़ क्षेत्र से विधायक चुने जाते थे। मेरे दामाद जो अब इस दुनिया में नहीं हैं, अमर उजाला दिल्ली में प्रबंधक थे। मेरे पिता जी का 1990 में जब निधन हुआ तो उनके जीवन पर एक विशेष लेख अमर उजाला में प्रकाशित हुआ था।
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स्वतंत्रता सेनानी रानी सरोज गौरिहार
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि अखबार की बात करूं तो आगरा में जनसरोकार व समाज की उन्नति में बहुत बड़ा योगदान है। अमर उजाला जैसा कोई दूसरा अखबार नहीं। पिता जी इस अखबार की खबरें लिखने की शैली से बहुत प्रभावित थे। डोरीलाल जी और पिता जी की बहुत से यादें हैं। मुझे उम्र की वजह से ठीक से याद नहीं आ रहीं। ये अखबार अपने 75वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। मुझे ये सुनकर बहुत खुशी होती है। मैं इस अखबार की एक जमाने से सुधी पाठक हूं। आगरा में जनसरोकार व समाज की उन्नति में अमर उजाला का बहुत बड़ा योगदान है। इस जैसा कोई दूसरा अखबार नहीं। पिता जी भी इस अखबार की खबरें लिखने की शैली से बहुत प्रभावित थे। 75वें वर्ष में प्रवेश पर बहुत बहुत बधाई।
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एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा
- फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला की खबरें सत्यता के नजदीक
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता बोले कि हमारा परिवार लोहामंडी पुनियापाड़ा में रहता था। पिताजी ओमप्रकाश गुप्ता सरकारी नौकरी में थे और अमर उजाला परिवार से पारिवारिक रिश्ते थे। अखबार शुरू हुआ तभी से पिताजी मंगवाते थे। मैंने जब अखबार के बारे में जाना तो वह अमर उजाला ही था। शहर की खबरें प्रमुखता से मिलती हैं। रोजाना अमर उजाला पढ़ना प्राथमिकता में रहता है। इसकी खबरें चटपटी या फिर सनसनी नहीं बल्कि खबर की तरह ही लिखी जाती हैं। इसकी खबरें सत्यता के नजदीक रहती हैं।