सर्दी के मौसम में धूप सेंकने के लिए इन दिनों चंबल नदी के किनारे घड़ियाल निकलने लगे हैं। इन्हें देखने के लिए देसी-विदेशी पर्यटक भी चंबल पहुंच रहे हैं। उधर, शुक्रवार से चंबल की बाह और इटावा रेंज में जलीय जीवों और पक्षियों की गणना भी शुरू हो गई। पहले दिन चंबल में घड़ियाल और मगरमच्छ खूब दिखे। लेकिन डॉल्फिन सिर्फ डीप पूल में ही गोते लगाती नजर आई।
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चंबल किनारे घड़ियाल
- फोटो : अमर उजाला
बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड ने बताया कि बाह रेंज में चार टीमों को मोटर वोट के साथ गणना के लिए नदी में उतारा गया। गिनती का काम पूरा होने के बाद आंकडे़ सार्वजनिक किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि गणना के दौरान टीमों को नदी में जलक्रीड़ा करते और किनारे धूप सेंकते घड़ियाल, मगरमच्छ और कछुए खूब दिखे, लेकिन डॉल्फिन की संख्या कम नजर आई।
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चंबल में घड़ियाल
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चंबल सेंक्चुअरी में वर्ष 2008 में 100 से ज्यादा घड़ियालों की मौत हो गई थी। मौत का रहस्य जानने के लिए विदेशी विशेषज्ञों की मदद लेनी पड़ी थी। तब से हर साल सर्दी के मौसम में इनकी गिनती होने लगी।
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चंबल में मगरमच्छ
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चंबल नदी में घड़ियाल और मगरमच्छ का संरक्षण किया जा रहा है जिन्हें देखने के लिए सैलानी चंबल पहुंचते हैं। इन दिनों तो ठंड में धूप सेंकने के लिए घड़ियाल और मगरमच्छ सुबह होते ही नदी से निकल आते हैं। उनकी गतिविधियां देखने के लिए रोजाना लोगों की भीड़ भी जुटती है।
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स्पूनबिल की चंबल में दस्तक
- फोटो : अमर उजाला
चंबल में प्रवासी और स्थानीय पक्षियों की भी गिनती हुई। पिछले साल तीन राज्यों के सर्वे में 185 प्रजाति के पक्षी मिले थे। वनकर्मियों ने बताया कि इस साल भी चाइना कूट, स्पूनबिल, कार्मोरेंट, रूडीशेल्डक, बार हैडेडगूज, पेंटेल, इंडियन स्कीमर आदि चिड़ियां भी काफी संख्या में देखने को मिलीं।