ट्रक पलटा और सीधे खोखे के ऊपर आकर गिर गया... मुश्किल से एक पल लगा होगा लेकिन इस एक पल ने गढ़ी गोदना के जगदीश की दुनिया को ही उजाड़ दिया। उसकी बगिया में तीन ही फूल खिले थे, तीनों मुरझा गए।
जिस बेटे को सब उसके घर का चिराग कहते थे, वह नहीं रहा। जिन बेटियों से घर की रोशनी थी, वे भी हादसे ने छीन ली। तीन ही बच्चे थे, तीनों की मौत हो गई। उसकी हालत देखकर गांव के लोग अपने आंसू नहीं रोक पा रहे। हादसा उसके सामने ही हुआ।
वह कुछ कर नहीं पाया। करता भी क्या। ट्रक के सामने बेबस था। अचानक ही सब कुछ हो गया। उसके परिवार के लोगों ने बताया कि आठ बजे वे गए थे।
जगदीश बच्चों से बातें कर रहा था। बेटे बंटी को टाफी दी थी। बेटी भावना और हिमांशू को चाय केसाथ फैन दिया था। स्कूल की बातें चल रही थी।
उसे क्या मालूम था कि पल भर में दुनिया ही उजड़ने जा रही है। वह खोखे से एक पल के लिए थोड़ा दूर हुआ ही था। इसी पल में ट्रक आ गिरा और उसका सबकुछ खत्म हो गया। उसका बुरा हाल है।