सांसद मुलायम सिंह यादव के निधन से खाली हुई मैनपुरी लोकसभा सीट पर उपचुनाव हो रहा है। समाजवादी पार्टी ने नेताजी की विरासत वाली सीट से मुलायम सिंह की बहू डिंपल यादव को मैदान में उतारा है। अब इस सीट पर चुनाव भले ही डिंपल यादव लड़ रही हैं, लेकिन साख सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की लगी हुई है। अखिलेश यादव सपा के मुखिया हैं और पार्टी प्रत्याशी के पति। ऐसे में मैनपुरी सीट पर सपा की प्रतिष्ठा दांव पर है।
चार अक्तूबर 1992 को मुलायम सिंह यादव ने सपा का गठन किया। इसके ठीक बाद उन्होंने मैनपुरी लोकसभा सीट पर 1996 में चुनाव लड़ा और जीता। नेताजी ने सैफई को जन्मस्थली तो वहीं मैनपुरी को हमेशा अपनी कर्मस्थली माना। चुनाव के दौरान कई मंचों से उन्होंने ये एलान भी किया। इसीलिए मैनपुरी की जनता हमेशा अपने नेता के साथ रही। मतदाताओं के सहयोग की दमभर ही 1996 से लेकर अब तक सपा मैनपुरी लोकसभा सीट पर काबिज है। नेताजी के निधन के बाद खाली हुई उनकी सीट पर अपनी उनकी बहू डिंपल यादव चुनाव मैदान में हैं। पार्टी हाईकमान की ओर से यह फैसला लिया गया है।
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संसदीय क्षेत्र में रोड शो के दौरान डिंपल यादव (फाइल फोटो)
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अब चुनाव भले ही डिंपल यादव लड़ रही हैं, लेकिन पर्दे के पीछे चुनाव अखिलेश यादव का ही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रत्याशी का पति होने के कारण उनकी जवाबदेही दोहरी हो गई है। कुल मिलाकर सपा के लिए मैनपुरी सीट सीधे-सीधे प्रतिष्ठा से जुड़ी है, क्योंकि मैनपुरी में सैफई परिवार की बहू है।
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मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव (फाइल)
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सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के आदेश के बाद ही मैनपुरी लोकसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में सपा से डिंपल यादव को टिकट दी गई है। अब अखिलेश यादव के सामने सपा की परंपरागत सीट को बचाने के साथ ही परिवार को एकजुट रखने की चुनौती रहेगी।
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सपा मुखिया अखिलेश यादव
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सपा मुखिया को इस बात का ध्यान रखना होगा कि परिवार के अंदर ही परिवारवाद का संदेश न चला जाए। टिकट कटने से परिवार के कुछ लोग नाराज भी हुए होंगे, ऐसे में इन्हें भी साथ लेकर चुनावी सफर पर चलना होगा।
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अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव
- फोटो : अमर उजाला
डिंपल यादव कन्नौज से सांसद रह चुकी हैं। फिरोजाबाद में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। मैनपुरी लोकसभा सीट पर भी डिंपल की राह आसान नहीं है। क्योंकि सपा का सीधा मुकाबला भाजपा से होगा। भाजपा भी इस सीट पर दमदारी से चुनाव लड़ेगी। वहीं धरतापुत्र मुलायम सिंह यादव जैसा लोकप्रिय नेता भी सपा के बीच नहीं है।