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विश्व गौरैया दिवसः यहां गौरैया की चहचहाहट से आबाद है वादियां
न्यूज डेस्क, अमर उजाला बाह (आगरा)
Updated Tue, 20 Mar 2018 12:53 PM IST
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विश्व गौरैया दिवस
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फुदकती गौरैया की चहचहाहट। अपने घरों में इसकी कमी महसूस करने वालों के लिए थोड़ी अच्छी खबर है। अपनी गौरैया चंबल में बढ़ रही है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश में फैली चंबल घाटी में गौरैया की संख्या विगत समय में काफी बढ़ी है। इनकी मौजूदगी देशी-विदेशी सैलानियों को सुखद अहसास कराती है। चंबल के साथ ही सूर सरोवर पक्षी विहार और अन्य सेंक्चुरी क्षेत्र में इनकी संख्या में काफी इजाफा हुआ है।
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प्राकृतिक आवास नष्ट होने से शहर ही नहीं गांवों में भी गौरैया कम दिखने लगी थी, लेकिन दो-तीन साल से वन विभाग की ओर से चंबल में चलाए गए संरक्षण अभियान का असर सुखद नजर आ रहा है। चंबल के राजस्थान से सटे क्षेत्र रेहा से लेकर इटावा से लगे उदयपुर खुर्द की सीमा तक जिधर नजर दौड़ाएं, उधर गौरैया दिखती हैं।
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चंबल किनारे के गांवों में तो बड़ी संख्या में फुदकती रहती हैं। पेड़ों पर भी इनके घोंसले झूलते दिखते हैं। वन्य जीव विशेषज्ञ सतेंद्र शर्मा बताते हैं कि चंबल में गौरैया की आबादी तेजी से बढ़ी है। यहां आने वाले सैलानी विलुप्त होती चिड़िया देखकर आश्चर्य में पड़ जाते हैं। बता दें कि पक्के मकान बनने, फसलों में कीटनाशकों के प्रयोग, शहरों में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के कारण गौरैया का अस्तित्व संकट में पड़ गया था।
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इसका असर ग्रामीण क्षेत्र में दिख रहा था। वन विभाग ने गौरैया संरक्षण के लिए ग्रामीणों का सक्रिय सहयोग लिया। उनको लकड़ी के घरौंदे देकर प्रेरित किया। जागरूकता अभियान का असर ये रहा कि क्षेत्र के गांवों में हर घर में इनके घरौंदे दिख जाएंगे। घरों की छत पर उनके लिए पानी रखा नजर आएगा। बाह के रेंजर अमित सिसोदिया, इटावा के रेंजर गिरिजेश तिवारी ने बताया कि चंबल में गौरैया के लिए प्राकृतिक रूप से भोजन घास के बीज- दाने होते हैं। इसके साथ लोगों की जागरूकता से परिदृश्य बदला।
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जैतपुर में डॉ. वीपी मिश्र के घर-आंगन में सैकड़ों गौरैया दिनभर फुदकती रहती हैं। गौरैया प्रेमी के रूप में उनकी पहचान ने उन्हें ‘स्पैरो मैन’ का उपनाम ही दे दिया है। उन्होंने बताया कि पांच साल पहले उन्होंने आंगन में पौधे लगाने के साथ गौरैया के लिए घौंसले बनाए थे। इसके बाद से ही उनकी संख्या बढ़ गई। अब आंगन में एक-दो नहीं, बल्कि सैकड़ों गौरैया की चहचहाहट सुनाई देती है। गौरैया दिवस की पूर्व बेला पर उन्होंने कहा कि गौरैया की संख्या में बढ़ोतरी सुखद एहसास है।