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ताजमहल की खूबसूरती पर लग रहा काला धब्बा, ये है वजह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Tue, 20 Mar 2018 12:28 PM IST
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दुनिया के सातवें अजूबे ताजमहल का सफेद संगमरमर उत्तर पश्चिम दिशा से आ रहे प्रदूषण के कारण काला पड़ रहा है। जीवाश्म ईंधन, बायोमास, वाहनों का धुआं और ताज के पास भारी निर्माण कार्यों से उड़ती धूल ने ताजमहल के संगरमरमर की सतह पर कालिख पोत दी है। यह खुलासा हुआ है एएसआई रसायन शाखा के शोध में, जो दो साल तक ताजमहल पर चला।
ताजमहल
- फोटो : ANI
हर दिन के सस्पेंडेड पर्टिकुलेट मैटर (एसपीएम) और हवा की दिशा की जांच के बाद इस शोध की रिपोर्ट ताज ट्रिपेजियम जोन अथारिटी को सौंप दी गई है। शोध में ताज पर प्रदूषण का मुख्य जरिया स्थानीय बताया गया है। साल 2016 और 2017 में जनवरी से दिसंबर तक के आंकड़ों की जांच में पाया गया कि सर्दियों में नवंबर के महीने में सबसे ज्यादा प्रदूषण ताज पर पाया गया। गर्मियों में अप्रैल के महीने में धूल कणों की संख्या ताज पर अधिक रही।
ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
ताज पर उत्तर पश्चिम दिशा से जो प्रदूषण आया, उसमें शहर की ओर से ज्यादा प्रदूषक तत्व जमा हुए। सैंपल के लिए जो फिल्टर पेपर लगाए गए, वह हर आठ घंटे पर बदले गए। हर घंटे की हवा की दिशा और प्रदूषण का आंकड़ा इस शोध में दिया गया है। अधीक्षण पुरातत्व रसायनविद् डा.एसके भटनागर का कहना है कि दो साल के प्रतिदिन के प्रदूषण आंकड़ों का अध्ययन किया गया है।
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ताजमहल
- फोटो : getty
पश्चिम और उत्तर पश्चिम दिशा से आए प्रदूषण का मुख्य जरिया शहर का ही है। जो सैंपल एकत्र किए हैं, उनमें कौन से प्रदूषक तत्व हैं, इसकी विस्तृत जांच का अगला चरण शुरू किया गया है’ एएसआई रसायन शाखा ने अपने शोध में उत्तर पश्चिम दिशा से आए प्रदूषण को मुख्य वजह बताया है। बता दें कि उत्तर पश्चिम दिशा में ही श्मशान घाट है। शहर की ओर से प्रदूषण की मुख्य वजह कूड़े का जलना और वाहनों का प्रदूषण है।
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टीटीजेड अथारिटी को एएसआई रसायन शाखा की यह रिपोर्ट उद्योगों पर लगी पर्यावरण मंत्रालय की तदर्थ रोक (एडहॉक मोरोटोरियम) को हटाने में सहायक साबित हो सकती है। प्रदेश सरकार पर्यावरण मंत्रालय में इस तदर्थ रोक को हटाने के लिए पैरवी करने वाली है। उद्योगों के प्रदूषण में जो तत्व पाए जाते हैं, वह यहां सैंपल में नहीं मिले हैं। मीनार के पास लगाए गए सैंपल में किस तरह के कार्बन कण हैं, इसकी विस्तृत जांच के लिए देश की अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में जांच की जाएगी। शोध का अगला चरण ताज के प्रदूषण की वजह बता देगा।