आगरा नगला नाथू की दर्दनाक घटना में वर्षा ने अपनी तीन भतीजी के साथ बहन और भांजी को भी खो दिया है। उसके आंसू रोके नहीं रुक रहे थे। वह बस यह कह रही थी कि नदी में दूर जाने से रोकती रही लेकिन वह यमुना की गहराई में जाती रहीं। बच्चियों ने मेरी हर हिदायत को अनसुना कर दिया। उसकी आंखों के सामने सभी बच्चियों को यमुना मौत के मुंह में खींच ले गई।
ये दर्द यमुना में डूबने वाली मुस्कान, दिव्या, संध्या व नैना की चाची, शिवानी की बहन और सोनम की मौसी वर्षा का था, जो फफक-फफक कर रो रही थी। वह भी बच्चों के साथ अपने बेटे (6) को लेकर यमुना घूमने गई थी। वहां पर सभी बच्चियां यमुना में नहाने की जिद करने लगीं।
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यमुना में डूबी छह लड़कियां
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वर्षा ने मना करते हुए कहा कि कल ही तो नहा कर गई थी। यमुना किनारे पर बच्चे को लेकर खड़ी रहीं और बच्चियों को रोकने का प्रयास करती हैं। वहां से खड़े होकर अधिक अंदर नहीं जाने की आवाज भी लगाती रहती हैं। उसकी आंखों के सामने सभी बच्चियां पानी के बहाव के चलते गड्ढे में फिसल गई। वह चिल्लाती रह गई। अब यह दर्द उसे सहन नहीं हो रहा।
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यमुना में डूबी छह लड़कियां
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छुट्टियां मनाने आई थी शिवानी और वर्षा
नगला रामबल की शिवानी और नगला नेहरा की सोनम वर्षा के घर गर्मियों की छुट्टियां मनाने रविवार को आई थीं। शिवानी ने हाईस्कूल और सोनम ने तीसरी कक्षा उत्तीर्ण की थी।
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यमुना में डूबी छह लड़कियां, मौके पर पहुंचे अधिकारी
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ऊबड़ खाबड़ और कच्चे रास्ते की बाधाओं से टूट गईं सांसें
आगरा के बिचपुरी ब्लॉक का गांव नगला नाथू यमुना किनारे बसा हुआ है। इस छोटे से गांव तक पहुंचने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है। रामलाल वृद्धाश्रम के निकट से ऊबड़-खाबड़ कच्चा रास्ता गांव तक पहुंचता है। मंगलवार की सुबह यमुना नदी में डूबी छह किशोरियों को निकालने में ग्रामीणों ने बहुत देर नहीं लगाई। तीन की सांसें चल रही थीं।
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यमुना में डूबी छह लड़कियां
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ग्रामीणों ने उन्हें सीपीआर दी। पेट दबाकर पानी निकाला। लेकिन एंबुलेंस 2 घंटे बाद गांव के बाहर तक ही पहुंच सकी। इस बीच ग्रामीण उनको निजी अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय से इलाज मिलता तो शायद कुछ बच्चियों की जान बचाई जा सकती थी। यमुना किनारे बसे गांव की सिकंदरा थाने से दूरी करीब 6 किलोमीटर है।