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आगरा चौहरा हत्याकांड: दूध में दीं नशे की गोलियां, फिर रेते मां-बच्चों के गले, तीन घंटे खंगाला घर

Wed, 28 Jul 2021 12:34 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 28 Jul 2021 12:34 AM IST
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Agra police solved woman and her three children murder case
मृतका रेखा का फाइल फोटो, हत्यारोपी संतोष और वीरू - फोटो : अमर उजाला

आगरा के कोतवाली क्षेत्र के कूंचा साधूराम मोहल्ले में रेखा और उसके तीन बच्चों का हत्यारोपी रिश्ते का भाई संतोष निकलेगा, यह किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। पुलिस की पूछताछ में पता चला कि संतोष ने हत्याकांड का पूरा तानाबाना बुना था। वह कई दिन से दोस्तों के साथ योजना बना रहा था। मकान दिखाने के बहाने रेखा से घर का गेट खुलवाया। अंदर जाने के बाद चुपके से दूध में नशे की गोलियां मिली दीं। बच्चों ने दूध पिया, लेकिन पूरी तरह से नशा नहीं हुआ, जिससे वे नहीं सोए। इसके बाद आरोपियों ने बड़ी ही क्रूरता से चारों के गले रते दिए। 



आईजी रेंज नवीन अरोरा ने बताया कि रेखा से संतोष ने दो लाख रुपये उधार लिए थे। वादा किया था कि वह ब्याज सहित लौटा देगा। मगर, ऐसा नहीं किया। इसके बाद रेखा से छह महीने पुराना स्कूटर भी ले लिया था। पूरी रकम नहीं दी। दो लाख रुपये और स्कूटर की रकम के लिए रेखा तगादा कर रही थी। संतोष ने अपनी दुकान के लिए पहले से कर्ज ले रखा था। इस कारण वो रेखा को रकम नहीं लौटा पा रहा था। रेखा के तगादे से बचने और अपना कर्ज चुकाने के लिए रेखा और उसके बच्चों की हत्या की साजिश रची, जिससे घर में आसानी से लूट कर सके। उसने अपने पड़ोसी अंशुल को शामिल किया, कहा कि जो पैसे और जेवरात मिलेंगे, उसे बांट लेगा। इसके बाद वीरू को भी अपने साथ कर लिया।

Agra police solved woman and her three children murder case
इसी स्कूटर से आए थे आरोपी - फोटो : अमर उजाला
रेखा के स्कूटर से आए थे तीनों 
तीनों आरोपी रेखा की एक्टिवा पर धूलिया गंज तक आए। धूलिया गंज पर स्कूटर खड़ा करके तीनों पैदल रेखा के घर पहुंचे। संतोष ने दरवाजा खटखटाया। रेखा के बेटे वंश उर्फ टुकटुक ने दरवाजा खोला। संतोष ने कहा कि यह मकान देखने आए हैं। टुकटुक ने मां से पूछा। रेखा ने तीनों को नीचे ही कमरे में बैठाने के लिए बोल दिया। वह पूजा कर रही थी।

टुकटुक बाजार से कपूर, फूल, कलावा, समोसे लेकर आया। वहीं दूसरी तरफ रेखा ने तीनों को ऊपर बुला लिया। संतोष नींद की गोलियां लेकर गया था। संतोष ने रेखा से कहा कि वह दवाई लाया है। यह डॉक्टर ने दी हैं, इससे शरीर का दर्द कम हो जाएगा। उसने रेखा को दूध में गोलियां दे दीं। बातचीत के दौरान बच्चों को भी दूध में नींद की गोलियां मिलाकर दे दीं। मगर, सभी को गोलियों का असर कम हुआ। वह बेहोश नहीं हुए। 
Agra police solved woman and her three children murder case
रेखा का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

सबसे पहले रेखा को मारा, बाद में टुकटुक को
रेखा ने पारस और माही को नीचे खेलने के लिए भेज दिया। रेखा चाय बनाने लगी। आरोपियों को डर था कि चाय पीने से कप पर कहीं फिंगर प्रिंट नहीं आ जाएं। इसलिए उन्होंने बहाना बनाकर चाय के लिए मना कर दिया, तब तक रेखा चाय बनाने के लिए रख चुकी थी। वीरू और अंशुल सोफे पर बैठे थे। रेखा किसी काम से अपने कमरे में गई। पीछे से संतोष भी कमरे तक पहुंच गया। उसने रेखा को पकड़ लिया। उससे पूछा कि माल कहां है। रेखा डर गई, उसने शोर मचाने का प्रयास किया। 

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Agra police solved woman and her three children murder case
मृतका रेखा का फाइल फोटो, हत्यारोपी संतोष और वीरू - फोटो : अमर उजाला

संतोष ने रेखा का मुंह दबाया और गर्दन में कैंची घुसेड़ दी। रेखा छटपटाने लगी। पलंग से नीचे गिर पड़ी। इसी बीच टुकटुक बाजार से लौटा। उसे मां की आवाज सुनाई पड़ी। वह ऊपर आया। संतोष के साथियों ने उसे पकड़ने का प्रयास किया। वह नीचे भागा, उसका चश्मा गिर पड़ा। अंशुल और वीरू उसे पकड़ कर स्टोर रूम में ले गए। वहां चाकू से टुकटुक का गला रेत दिया। पारस और माही नीचे थे। संतोष को लगा कि इन दोनों को जिंदा छोड़ा तो ये पुलिस को बता देंगे। संतोष के कहने पर अंशुल और वीरू दोनों बच्चों को ऊपर ले आए। हत्यारोपियों ने उन्हें बेड पर पर मार डाला।

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हत्यारोपी संतोष और वीरू - फोटो : अमर उजाला
पुलिस से बचने के लिए कर रखी थी पूरी तैयारी 
संतोष ने हत्याकांड के बाद पुलिस से बचने की भी पूरी तैयारी कर रखी थी। वह अपने साथ हैंड ग्लव्स लेकर आया था, जिससे उनके फिंगर प्रिंट नहीं आएं। वहीं घर पर रेखा के चाय बनाने पर डर था कि कप पर उनके फिंगर प्रिंट आ जाएंगे। इसलिए चाय पीने से मना कर दिया। पुलिस को आशंका है कि वह कैंची और चाकू भी अपने साथ लेकर आए थे। हत्या के अगले दिन बस से संतोष और अंशुल सोरों, कासगंज, कन्नौज, कानपुर होते हुए चित्रकूट पहुंचे। वीरू भी उनके पीछे-पीछे गया। मंगलवार को लौटकर आए थे।  
 
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