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आगरा से लौटकर चमका था शिवाजी का सितारा, मुगलों से जीते थे 23 किले, पढ़ें गौरवगाथा
Sat, 19 Sep 2020 01:50 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 19 Sep 2020 01:50 AM IST
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आगरा किले के सामने लगी शिवाजी की प्रतिमा।
- फोटो : अमर उजाला
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छत्रपति शिवाजी महाराज ने आगरा से लौटकर मुगलों से वे सभी 23 किले जीत लिए थे जो 1665 में पुरंदर की संधि में देने पड़े थे। इतिहासविद कहते हैं कि आगरा से लौटकर ही उनका सितारा चमका था। औरंगजेब की कैद में रहने के बाद स्वराज्य का जो संकल्प लिया, आजाद होकर उसी के लिए काम किया। उनके आगरा से राजगढ़ लौटने की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। अब जब मुगल म्यूजियम का नाम छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय कर दिया गया है तो लोग इतिहास के पन्ने पलटकर उनके बारे में और जानकारी कर रहे हैं।
छत्रपति शिवाजी
इतिहासविद डॉ. तरुण शर्मा ने बताया कि शिवाजी से मुगल सेना के कुछ अधिकारी और औरगंजेब के परिवार के लोग सहानुभूति रखते थे। एक किस्सा यह भी है कि औरंगजेब की बहन रोशनआरा और जहांआरा में आपस में नहीं बनती थी। रोशनआरा के कहने पर ही औरंगजेब ने शिवाजी को नजरबंद कराया जबकि जहांआरा इससे सहमत नहीं थी। कई सैन्य अधिकारियों की सहमति न होने के कारण भी शिवाजी को औरंगजेब की कैद से निकलने में आसानी हुई।
आगरा किला
- फोटो : Amar Ujala
मथुरा में साधू के वेष में रहे थे शिवाजी और संभाजी
शिवाजी जब आगरा से निकले तो वह महाराष्ट्र के परंपरागत मार्ग से नहीं गए। उन्होंने नया रास्ता पकड़ा। पहले मथुरा गए। यहां सवा महीने तक मराठा ब्राह्मण परिवार के साथ वह और उनके पुत्र संभाजी ब्राह्मण के वेश में रहे। इसके बाद वह अकेले ही राजगढ़ गए, क्योंकि अगर पुत्र के साथ जाते तो पहचान लिए जाने का डर था। हालांकि इतिहास में एक मत यह भी है कि शिवाजी संभाजी को प्रयागराज में छोड़ गए थे।
शिवाजी जब आगरा से निकले तो वह महाराष्ट्र के परंपरागत मार्ग से नहीं गए। उन्होंने नया रास्ता पकड़ा। पहले मथुरा गए। यहां सवा महीने तक मराठा ब्राह्मण परिवार के साथ वह और उनके पुत्र संभाजी ब्राह्मण के वेश में रहे। इसके बाद वह अकेले ही राजगढ़ गए, क्योंकि अगर पुत्र के साथ जाते तो पहचान लिए जाने का डर था। हालांकि इतिहास में एक मत यह भी है कि शिवाजी संभाजी को प्रयागराज में छोड़ गए थे।
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शिवाजी के नाम से होगा आगरा का म्यूजियम
- फोटो : अमर उजाला
दो साल में शक्ति अर्जित की और फिर बोला धावा
तरुण शर्मा ने बताया कि राजगढ़ पहुंचकर शिवाजी दो साल तक शांत रहे और शक्ति अर्जित करते रहे। इस बीच स्थितियां बदल चुकी थीं। दक्कन की सूबेदारी अब औरंगजेब के पुत्र मोअज्जम खां के पास आ गई। मिर्जा राजा जय सिंह की जगह जसवंत सिंह आ गए। मोअज्जम और जसवंत सिंह का शिवाजी के प्रति नरम रवैया था। शिवाजी स्वराज्य के लक्ष्य से नहीं हटे और शक्ति बढ़ाने के बाद एक -एक कर वे किले जीते जो पुरंदर की संधि में मुगलों को दिए थे। 1674 में उनका राज्याभिषेक हुआ और उन्होंने मराठा सम्राज्य की नींव रखी।
तरुण शर्मा ने बताया कि राजगढ़ पहुंचकर शिवाजी दो साल तक शांत रहे और शक्ति अर्जित करते रहे। इस बीच स्थितियां बदल चुकी थीं। दक्कन की सूबेदारी अब औरंगजेब के पुत्र मोअज्जम खां के पास आ गई। मिर्जा राजा जय सिंह की जगह जसवंत सिंह आ गए। मोअज्जम और जसवंत सिंह का शिवाजी के प्रति नरम रवैया था। शिवाजी स्वराज्य के लक्ष्य से नहीं हटे और शक्ति बढ़ाने के बाद एक -एक कर वे किले जीते जो पुरंदर की संधि में मुगलों को दिए थे। 1674 में उनका राज्याभिषेक हुआ और उन्होंने मराठा सम्राज्य की नींव रखी।
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म्यूजियम की इमारत
- फोटो : अमर उजाला
ताजमहल से 1300 मीटर दूर बन रहे मुगल म्यूजियम का नाम छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर रख दिए जाने के साथ ही अब इसका निर्माण जल्द पूरा होने की उम्मीद है। नौ महीने से म्यूजियम का काम बंद पड़ा हुआ है। दिसंबर, 2017 में म्यूजियम का निर्माण पूरा होना था, लेकिन बजट न मिलने से म्यूजियम का काम रुका रहा। अब तय समय से चार साल बाद ही म्यूजियम का काम पूरा हो सकेगा।