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राजा मानसिंह हत्याकांड: 35 साल बाद आया फैसला, सुनवाई के दौरान 1700 तारीख, 25 जिला जज बदले

Wed, 22 Jul 2020 11:08 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 22 Jul 2020 11:08 AM IST
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11 policemen convicted for killing Raja Mansingh in fake encounter 35 yrs ago in Bharatpur
राजा मान सिंह की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

भरतपुर के राजा मानसिंह और दो अन्य की हत्या के मामले में 11 पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया गया है। 21 फरवरी 1985 को हुए इस बहुचर्चित हत्याकांड की सुनवाई के दौरान 1700 तारीखें पड़ीं और 25 जिला जज बदल गए। वर्ष 1990 में यह केस मथुरा जिला जज की अदालत में स्थानांतरित किया गया। 35 साल बाद 21 जुलाई 2020 (मंगलवार) को राजा मानसिंह हत्याकांड में निर्णय हो सका है। वादी पक्ष के अधिवक्ता नारायन सिंह विप्लवी ने बताया कि अब तक आठ दफा फाइनल बहस हो चुकी है और 78 कुल गवाह पेश हुए, जिनमें से 61 गवाह वादी पक्ष ने तो 17 गवाह बचाव पक्ष ने पेश किए हैं।




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11 policemen convicted for killing Raja Mansingh in fake encounter 35 yrs ago in Bharatpur
राजा मान सिंह का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

क्या था पूरा घटनाक्रम
घटनाक्रम की शुरुआत 20 फरवरी 1985 से पूर्व ही शुरू हो चुकी थी। कांग्रेस शासित राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर की चुनावी सभा की तिथि 20 फरवरी तय की गई। सभा से पूर्व ही कांग्रेसियों ने निर्दलीय रहकर भी जीत हासिल करने वाले राजा मानसिंह के झंडे उखाड़ दिए। गुस्साए राजा मान सिंह ने मुख्यमंत्री के सुरक्षा घेरे को तोड़ते पहले हेलीकॉप्टर और बाद में जोंगा की टक्कर से सभास्थल पर मंच को ध्वस्त कर दिया। टूटे मंच से ही मुख्यमंत्री ने सभा की और पूरे घटनाक्रम के लिए पुलिस अधिकारियों की खिंचाई की।




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11 policemen convicted for killing Raja Mansingh in fake encounter 35 yrs ago in Bharatpur
राजा मान सिंह का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

पुलिस ने राजा मान सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। अगले दिन 21 फरवरी 1985 को जैसे ही राजा मान सिंह लाल कुंडा चुनाव कार्यालय से डीग थाने के सामने से गुजरे सीओ कान सिंह भाटी के चालक महेंद्र द्वारा सरकारी जीप को जोंगा के सामने खड़ा कर दिया गया। पुलिस ने उन्हें घेर लिया। इसके बाद लोगों को सिर्फ फायरिंग सुनाई दी। जोंगा में बैठे राजा मान सिंह, उनके साथ सुम्मेर सिंह और हरी सिंह के शव जोंगा से बाहर निकले। इस मामले में राजा की बेटी ने 18 लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया था। 

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राजा मानसिंह हत्याकांड के दोषी - फोटो : अमर उजाला

1990 में मथुरा स्थानांतरित हुआ था मामला

तीन-चार दिन में यह मामला सीबीआई के सुपुर्द कर दिया गया। सीबीआई ने हत्या से पूर्व दर्ज हुए मुकदमों में एफआर लगा दी। हत्या का मामला जयपुर की सीबीआई की विशेष अदालत में चला। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह केस 1990 में मथुरा न्यायालय स्थानांतरित हो गया। 
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राजा मानसिंह हत्याकांड के दोषी - फोटो : अमर उजाला

अस्थाई जेल में बनाई विशेष बैरक, मांगी सुरक्षा

राजा मानसिंह हत्याकांड के 11 अभियुक्तों के अस्थाई जेल में पहुंचने पर एक अस्थाई बैरिक तैयार कर ली गई। यह बैरक अस्थाई जेल रतनलाल फूल कटोरी गर्ल्स इंटर कॉलेज में बनाई गई है। यहां पर ही हत्याकांड के 11 दोषियों को रखा गया है। साथ ही संवेदनशील दोषियों के चलते वरिष्ठ जेल अधीक्षक शैलेंद्र मैत्रेय ने पुलिस से सुरक्षा बढ़ाने को कहा है। उनका कहना है कि सभी 11 अभियुक्तों  को अस्थाई जेल की बैरक में रखा जाएगा। हमने स्वास्थ्य विभाग की टीम को सभी की कोरोना जांच के लिए कहा गया है।

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