हिमाचल में 13050 फीट ऊंचाई पर स्थित इस सड़क पर सफर करना जोखिम से भरा है। सड़क के दोनों तरफ 20 से 25 फीट ऊंची बर्फ की दीवारों के बीच से वाहन गुजरते हैं।
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रोहतांग दर्रा
- फोटो : अमर उजाला
यहां सफर खतरों से भरा जरूर है, लेकिन ये जगह बर्फ से लकदक खूबसूरत वादियों के लिए भी मशहूर है। बात रोहतांग दर्रे की हो रही है। रोहतांग को मढ़ी तक पर्यटक वाहनों के लिए खोला गया है। ऐसे में बड़ी संख्या में पर्यटक जोखिम उठाकर यहां खूबसूरत नजारों के दीदार को पहुंच रहे हैं। वहीं, लाहौल जाने वाले लोग पैदल ही मढ़ी से आगे रोहतांग को पार कर रहे हैं।
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रोहतांग दर्रा
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गुरुवार को मनाली की ओर से स्थानीय लोगों के साथ प्रवासी मजदूरों ने भी दर्रा पार किया। लेकिन, लाहौल का एक स्थानीय युवक दर्रा पार करते हुए हरचा गड़ू की उतराई उतरते हुए फिसल गया। युवक का पैर फिसल जाने से वह गहरी खाई में गिरने से घायल हो गया।
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रोहतांग दर्रा
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बीआरओ ने मनाली-सरचू-लेह मार्ग को बहाल करने का कार्य तेज कर दिया है। गुरुवार को बीआरओ का बर्फ हटो अभियान का काफिला जिंगजिंगबार दर्रा के पास पहुंचा है। अभी भी हिमाचल की सीमा सरचू तक पहुंचने में सीमा सड़क संगठन को खूब पसीना बहाना होगा।
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रोहतांग दर्रा
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जिंगजिंगबार से लेकर सरचू तक 53 किलोमीटर दायरे से बर्फ हटाना शेष रहा गया है। गुरुवार को बीआरओ के कमांडर स्वयं जिंगजिंगबार पहुंचे और बर्फ हटाओ अभियान का जायजा लेते हुए जवानों को बर्फ हटाने के कार्य में गति देने का आह्वान किया। कमांडर ने मई अंत तक मनाली-सरचू-मार्ग के बहाल होने का दावा किया है।