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यकीन मानिए, मां के इस मंदिर में माथा नहीं टेका तो शायद कभी वापस न जा पाएंगे

Sat, 23 Sep 2017 03:39 PM IST
amarujala.com/shimla- presented by: अरविंद ठाकुर
amarujala.com/shimla- presented by: अरविंद ठाकुर Updated Sat, 23 Sep 2017 03:39 PM IST
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Taranda Devi Temple On The NH5 In Kinnaur Himachal Pradesh

जी हां यह बिल्कुल सच है। यहां से गुजरने वाली हर गाड़ी यहां रुकती है। तरंण्डा देवी का यह मंदिर हिमाचल के किन्‍नौर जिले के एनएच-5 के किनारे स्थित है। रामपुर से करीब 40 किमी दूर इस मंदिर का इतिहास बहुत ही रोचक है।

Taranda Devi Temple On The NH5 In Kinnaur Himachal Pradesh

1962 में भारत का चीन से युद्घ हुआ। युद्घ खत्म होने पर सेना ने यहां के रास्ते से रोड बनाने की सोची ताकि बॉर्डर तक सेना को गोला बारूद और अन्य सामान पहुंचाया जा सके।

Taranda Devi Temple On The NH5 In Kinnaur Himachal Pradesh

पहले रोड सिर्फ रामपुर तक ही था। 1963 में सेना के GREF विंग (अब इस विंग को बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन कहा जाता है) ने यहां सड़क बनाने का काम शुरू किया।

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Taranda Devi Temple On The NH5 In Kinnaur Himachal Pradesh

यहां तक जब पहुंचे तो रोड आगे बनाना बहुत मुश्किल हो गया। रोज चट्टानें गिरने से आए दिन किसी न किसी मजदूर की मौत हो जाती।

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Taranda Devi Temple On The NH5 In Kinnaur Himachal Pradesh

सेना के लोग भी काफी परेशान हो गए। इस बीच तरंण्डा गांव के लोग गांव में बने मंदिर मां चंद्रलेखा के पास पहुंचे।

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