घर के भीतर एक कमरे के कोने में बहन के कंधों पर बेसुध पड़ी उषा और चारों तरफ पसरा सन्नाटा। कुछ देर बार जब उषा को होश आता है तो बस होंठो पर एक ही बात। मेरा दीपू बेटा कहां गया...मेरे दीपू को ला दो...मेरे बिना अकेला कैसे रहेगा वो वहां। बेटा मुझे भी साथ ले जाता इस अभागी मां को यहां अकेला छोड़ गया.... किसके सहारे जीऊंगी मैं। अपनी एक झलक तो दिखा दे। एक बार आ जा बेटा दीपू अपनी मां की बात मान ले...बस एक बार आ जा।
25 सालों में सूना हो गया उषा का संसार, आज सब कुछ खो बैठी
अरविंद ठाकुर, अमर उजाला, हमीरपुर
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Thu, 17 Jan 2019 01:54 PM IST
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