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हिमाचल: भारत-चीन सीमा सड़क निर्माण में बाधा डालने वालों पर हाईकोर्ट सख्त, मांगे नाम, दिया ये अल्टीमेटम

Tue, 15 Sep 2026 02:08 AM IST
Digvijay Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 15 Sep 2026 02:08 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भारत-चीन सीमा पर बनाई जा रही सामरिक महत्व की महत्वपूर्ण सड़क (इंडो-चाइना रोड प्रोजेक्ट) के निर्माण कार्य में स्थानीय लोगों की ओर से पैदा की जा रही बाधा पर कड़ा रुख अपनाया है। 

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High Court takes a tough stance against those obstructing India-China border road construction in shimla
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भारत-चीन सीमा पर बनाई जा रही सामरिक महत्व की महत्वपूर्ण सड़क (इंडो-चाइना रोड प्रोजेक्ट) के निर्माण कार्य में स्थानीय लोगों की ओर से पैदा की जा रही बाधा पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने जिला किन्नौर के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को आदेश दिए हैं कि वे तुरंत हस्तक्षेप कर निर्माण स्थल पर किसी भी तरह की रुकावट को रोकें और कंपनी को सुरक्षा प्रदान करें।

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न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने किन्नौर के डीसी और एसपी को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि स्थानीय लोगों की ओर से सड़क निर्माण में कोई बाधा न आए। प्रशासन पहले स्थानीय लोगों से बात कर मामला सुलझाए। यदि वे सहयोग करने से इन्कार करते हैं, तो उनके नाम और विवरण तुरंत हाईकोर्ट को भेजे जाएं, जिससे उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जा सके। स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन या स्थानीय लोगों की ओर से इस आदेश का उल्लंघन करने पर इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा और इसके गंभीर दंडात्मक परिणाम होंगे। इसके साथ ही राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया गया है। मामले की सुनवाई 13 अक्तूबर को होगी। अदालत ने यह आदेश बृज गोपाल कंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया है।
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उल्लेखनीय है कि कंपनी भारत-चीन सीमा पर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के लिए अत्यधिक ऊंचाई वाली सामरिक सड़क का निर्माण कर रही है, जिसे समयसीमा के भीतर पूरा किया जाना अनिवार्य है। किन्नौर में निर्माण कार्य के दौरान कुछ मलबे के नदी में गिरने से जल शक्ति विभाग का एक वाटर स्टोरेज टैंक क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। कंपनी ने नए वाटर टैंक के लिए न केवल सामग्री उपलब्ध कराई, बल्कि अपने खर्च पर डीसिल्टिंग चैंबर, डैम बनाने और लगभग 2400 मीटर एचडीपीई पाइपलाइन, पंप और डीजी सेट देने पर भी सहमति जताई। इसके बावजूद कुछ स्थानीय लोग इस बात पर अड़ गए कि डीसिल्टिंग चैंबर के निर्माण का ठेका उनकी पसंद के व्यक्ति को ही दिया जाए। इसी मांग को लेकर उन्होंने राष्ट्रीय महत्व के इस प्रोजेक्ट के काम को रोक दिया। स्थानीय प्रशासन से बार-बार सुरक्षा मांगने के बाद भी जब मदद नहीं मिली, तो कंपनी को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

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