हिमालय की गोद में बसे इस मंदिर का यह रहस्यमयी कक्ष साल में सिर्फ एक दिन के लिए ही खुलता है। यहां राजकुमारी के साथ कुछ ऐसा हुआ था कि वह हत्यादेवी बन गई थी। हत्या माता की एक गांव पर असीम कृपा है जबकि एक गांव के लोग यहां जाने से भी डरते हैं। आइए जानते हैं पूरी कहानी-
मंदिर हिमाचल के मंडी में स्थित है। इस जिले को पहले सुकेत नाम से जाना जाता था। मनोरम पहाड़ों के बीच बसे छोटे से गांव पागंणा में ही महामाया देवी कोट का मंदिर है। कहते हैं सुकेत रियासत की कमान राजा रामसेन के पास थी। राजा की बेटी यानि राजकुमारी चंद्रावती थी जो कि बचपन से ही शिव पार्वती की अनन्य भक्त थी।
सर्दी के मौसम में एक बार राजकुमारी अपने महल में सहेलियों के साथ खेल रही थी। खेल खेल में एक सहेली ने पुरूष रूप धारण कर लिया। इसी दौरान राज पुरोहित यहां से गुजरा। उसे लगा कि राजकुमारी चंद्रावती किसी अज्ञात युवक के साथ खेल रही है। पुरोहित तुरंत राजा के पास गया और पूरी बात बता दी जिससे राजा क्रोधित हो गए।
लोकलाज से चिंतित राजा ने फौरन चंद्रावती को शीतकालीन राजधानी पांगणा भेज दिया। चंद्रावती ने अपना अपमान समझा और खुद को पवित्र साबित करने के लिए खौफनाक कदम उठा लिया। चंद्रावती ने रती नाम का विषैला बीज एक शिला पर पीसकर खा लिया जिससे उसकी मौत हो गई। यह शिला आज भी पांगणा में मौजूद है। आगे पढ़िए कैसे बनी हत्यादेवी-
प्राण त्यागने के बाद देवी चद्रावंती उसी रात अपने पिता राजा रामसेन के सपने में आई और उन्हें पूरी कहानी बताई। देवी ने कहा कि मेरे मृत शरीर को महामाया देवी कोट मंदिर पांगणा के परिसर में दबाया जाए। इसे छह माह बाद दोबारा से जमीन से बाहर निकालना। अगर मैं पवित्र हूं तो मेरा शरीर उस समय भी पूरी तरह से यथावत रहेगा और यदि पवित्र नहीं तो यह पूरी तरह से गल सड़ जाएगा।