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हिमाचल में फिर से लहलहाने लगी लाल चावल की फसल, जानें इसके औषधीय गुण

Sun, 13 Dec 2020 06:22 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, ऊना
अमर उजाला नेटवर्क, ऊना Published by: Krishan Singh Updated Sun, 13 Dec 2020 06:22 PM IST
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Red rice crop in Himachal pradesh, know its medicinal properties
Red Rice Farming - फोटो : अमर उजाला

हिमाचल प्रदेश में विलुप्त होने की कगार पर पहुंची लाल चावल की फसल अब फिर से लहलहाने लगी है। कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर ने बताया कि मानव जाति की ओर से अपनी उत्पत्ति के आरंभिक काल के दौरान खाद्यान्न के रूप में उपभोग की जाने वाली लाल चावल की फसल लगभग 10 हजार वर्ष पुरानी आंकी जाती है। उन्होंने बताया कि हरित क्रांति के दौर में किसानों ने नकदी और ज्यादा उत्पादन वाली फसलों की प्रजातियों को अपनाने से सदियों से उगाई जाने वाली पारंपरिक फसलें हाशिए पर चली गईं। जनवितरण प्रणाली से अनाज के वितरण के कारण किसानों ने इन फसलों से किनारा कर लिया। अब स्वास्थ्य के प्रति संजीदगी, पर्यावरण परिवर्तन तथा जलवायु परिवर्तन की वजह से किसानों ने लाल चावल की फसल को फिर से उगाना शुरू कर दिया है।


 
Red rice crop in Himachal pradesh, know its medicinal properties
कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर - फोटो : अमर उजाला

कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि सुगंधित लाल चावल की फसल में विशेष पोषाहार तथा औषधीय तत्व हैं। इन्हें परंपरागत रूप में ब्लड प्रेशर, कब्ज, महिला रोग, ल्यूकोरिया जैसे रोगों के उपचार में प्रयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस समय लाल चावल की फसल को पानी की बहुतायत वाले चिड़गांव, रोहड़ू, रामपुर, कुल्लू घाटी, सिरमौर तथा कांगड़ा जिला के ऊपरी क्षेत्रों में किया जाता है। राज्य में लोकप्रिय लाल चावल की किस्मों में रोहड़ू में छोहारटू, चंबा में सुकारा तियान, कांगड़ा में लाल झिन्नी तथा कुल्लू में जतू और मटाली किस्में किसानों द्वारा उगाई जाती हैं। 

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चावल - फोटो : अमर उजाला

1100 हैक्टेयर में हो रही लाल चावल की खेती
कंवर ने बताया कि लाल चावल की फसल मध्य हिमालय के पानी की बहुतायत वाले क्षेत्रों में मोटी मिट्टी में गर्म तथा आर्र्दता भरे वातावरण में उगाई जाती है। इस समय यह फसल 213 हेक्टेयर भूमि में शिमला जिला के सुरु कूट, कुथरु, गानवी, जांगल, नाडाला, कलोटी, देवीधार आदि क्षेत्रों में उगाई जाती है। चंबा जिला में लाल चावल की फसल 107 हेक्टेयर में मानी, पुखरी, साहो, कीड़ी, लाग, सलूणी और तीसा क्षेत्रों में उगाई जाती है। 

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- फोटो : अमर उजाला

कांगड़ा जिला में 416 हेक्टेयर भूमि पर बैजनाथ, धर्मशाला और बंदला आदि क्षेत्रों में उगाई जा रही है। मंडी जिला में 278 हेक्टेयर भूमि पर जंजैहली, चुराग, थुनाग क्षेत्रों में तथा कुल्लू जिला में 89 हेक्टेयर भूमि चावल की फसल उगाई जाती है। कंवर ने बताया कि लाल चावल की फसल राज्य के लगभग 1100 हेक्टेयर में उगाई गई है। बीते वर्षों में लाल चावल की फसल के अधीन क्षेत्रों में हल्की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने बताया कि राज्य में गत वर्ष के दौरान 8 से 10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर औसतन पैदावार हुई। इसके परिणाम स्वरूप राज्य में 9926 क्विंटल लाल चावल की फसल का उत्पादन हुआ है। उन्होंने बताया राज्य में आगामी पांच वर्षों में लाल चावल की फसल के तहत 4000 हेक्टेयर क्षेत्र तथा 40,000 क्विंटल फसल की पैदावार का लक्ष्य है।

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- फोटो : अमर उजाला

4122 किसान परिवार कर रहे लाल चावल की खेती
कृषि मंत्री ने बताया कि लाल चावल में लगभग 200 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है जोकि सफेद चावल के मुकाबले पांच गुणा ऊंची दर है। उन्होंने बताया कि राज्य में इस समय लगभग 4122 किसान परिवार लाल चावल की खेती करते हैं। आगामी पांच सालों में लगभग 10 हजार किसानों को चावल की खेती के अंतर्गत कवर करने का लक्ष्य है।

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