हिमाचल प्रदेश में लोकतंत्र की मिनी संसद के चुनाव में स्वतंत्र भारत के प्रथम मतदाता श्याम सरण नेगी (103) में भी उत्सुकता दिखी। उम्र के इस दौर तक नेगी एक बार भी मतदान से नहीं चूके। लोकसभा हो, विधानसभा या फिर पंचायती राज चुनाव, सभी में नेगी ने अपने मत का इस्तेमाल किया। रविवार को हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनाव के पहले चरण के मतदान में नेगी ने कल्पा स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला में दोपहर 12:17 बजे मतदान किया। उन्होंने प्रदेश के हर नागरिक से मतदान की अपील की। इससे पूर्व जिला प्रशासन ने उनके स्वागत के लिए मतदान केंद्र पर लाल कारपेट बिछाकर स्वागत किया। उपायुक्त किन्नौर हेमराज बैरवा ने नेगी का टोपी और अंग वस्त्र पहनाकर अभिनंदन किया।
नेगी ने देश के युवाओं से भी आग्रह किया कि वे हर चुनाव में मतदान करें, ताकि लोकतंत्र बना रहे और हम पसंद की सरकार चुन सकें। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से आज तक कोई ऐसा चुनाव नहीं है, जिसमें मतदान न किया हो। नेगी का घर कल्पा के वार्ड नंबर एक में आता है। चुनाव आयोग के ब्रांड एंबेसडर रह चुके नेगी का कहना है कि वह रोजाना रेडियो के माध्यम से पंचायती राज चुनावों की हलचल के बारे में सुन रहे हैं। उन्होंने जिले में नई पंचायतों के गठन को लेकर खुशी जाहिर की और कहा कि जितनी ज्यादा पंचायतों का गठन होगा, उतना ही जिले में ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिलेगा।
श्याम सरन नेगी का जन्म जुलाई 1917 को किन्नौर के कल्पा में हुआ। 10 साल की उम्र में स्कूल गए नेगी की पांचवीं तक की पढ़ाई कल्पा में हुई। इसके बाद पढ़ाई के लिए रामपुर गए। रामपुर जाने के लिए पैदल तीन दिन लगते थे। नौवीं कक्षा तक की पढ़ाई रामपुर में ही की। लेकिन उम्र ज्यादा होने की वजह से 10वीं कक्षा में प्रवेश नहीं मिला। मास्टर श्याम सरण नेगी ने शुरू में 1940 से 1946 तक वन विभाग में वन गार्ड की नौकरी की ।
उसके बाद शिक्षा विभाग में चले गए और कल्पा लोअर मिडल स्कूल में अध्यापक बने। देश में फरवरी 1952 में पहला लोकसभा चुनाव हुआ लेकिन किन्नौर में भारी हिमपात के चलते पांच महीने पहले सितंबर 1951 में ही चुनाव हो गए। पहले चुनाव के समय श्याम सरण नेगी किन्नौर के मूरंग स्कूल में अध्यापक थे और चुनाव में उनकी ड्यूटी लगी थी। उन्हें वोट देने का भी शौक था।
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श्याम सरण नेगी
- फोटो : अमर उजाला
उनकी ड्यूटी शौंगठोंग से मूरंग तक थी जबकि वोट कल्पा में था। इसलिए उन्होंने सुबह-सुबह वोट देकर ड्यूटी पर जाने की इजाजत मांगी। वह सुबह-सुबह मतदान स्थल पर पहुंच गए। लेकिन 6 बजकर 15 मिनट पर मतदान ड्यूटी पार्टी पहुंची। नेगी ने जल्दी मतदान करवाने का निवेदन किया। मतदान पार्टी ने रजिस्टर खोलकर उन्हें पर्ची दी। मतदान करते ही इतिहास बन गया और मास्टर श्याम सरण नेगी आजाद भारत के पहले मतदाता बन गए।