शहीद राजेश ऋषि की पार्थिव देह किन्नौर के पूह से देर रात सोलन पहुंच गई थी। रविवार सुबह सोलन से नालागढ़ के लिए पार्थिव देह भेजी गई। इधर, शहीद की पार्थिव देह गांव के नजदीक पहुंच रही थी और पत्नी घर में पति की सलामती की दुआएं मांग रही थी।
पत्नी पिंकी को आधा घंटा पहले ही बताया गया कि राजेश शहीद हो गए हैं। पिंकी ने रोजाना की तरह रविवार सुबह भी पूजा-पाठ किया। कुछ ही देर बाद उसके कदमों तले जमीन खिसक गई। पति की शहादत की सूचना मिलने पर पिंकी अपने होशोहवास खो बैठी। परिवार वालों और रिश्तेदारों ने उसे संभाला।
नालागढ़ उपमंडल के जगतपुर गांव के सैनिक राजेश ऋषि पर परिवार का पूरा दारोमदार था। पिता रणजीत सिंह बुजुर्ग हैं और मां दिव्यांग। भाई भी दिव्यांग हैं जो किसी भी बात को सही ढंग से समझने में असमर्थ हैं। औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन के बद्दी के समीप थाना गांव की पिंकी राजेश ऋषि के साथ 12 दिसंबर को परिणय सूत्र में बंधी थीं।
रिश्तेदारों को शहादत की खबर शनिवार सुबह मिल गई थी। मां माया देवी को राजेश के मिलने और अस्पताल में उपचार चलने की जानकारी दी गई थी। देर शाम को मां को बस इतना ही कहा गया कि राजेश की तबीयत काफी खराब हो गई है। परिवार को शहादत की सूचना तब दी गई, जब सैनिक का पार्थिव शरीर नालागढ़ से आगे पहुंच गया था।
सेना की ओर से सैनिक कल्याण के उपनिदेशक मेजर दीपक कुमार धवन, डोगरा रेजिमेंट के मेजर राहुल ठाकुर, शहीद की यूनिट 7जेएंडके राइफल के नायब सूबेदार दीपक राणा के अलावा नालागढ़ के विधायक लखविंदर राणा, दून के विधायक परमजीत सिंह पम्मी ने शहीद को श्रद्धांजलि दी।