देश के लिए अपनी जान देने वाले परमवीर चक्र विजेता शहीद कैप्टन विक्रम बतरा को श्रद्घांजलि देने के बाद पिता ने अपनी ख्वाहिश भी बयां कर दी। बेटे की याद में पिता की आंखें भर आई लेकिन उन्हें इस बात पर गर्व है कि बेटे ने देश के लिए अपना बलिदान दिया।
कैप्टन विक्रम बतरा को सलाम, शहादत पर पिता ने बयां की अपनी ख्वाहिश
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सात जुलाई को टाईगर हिल-4875 की चोटी को फतह कर अपनी जान देने वाले शहीद कैप्टन विक्रम बतरा को हिमाचल के पालमपुर में श्रृदांजलि दी गई। शहीद के पिता जीएल बतरा और माता कमला बतरा के अलावा स्थानीय लोगों ने भी विक्रम बतरा को श्रद्घांजलि दी।
इसके बाद शहीद कैप्टन विक्रम बतरा के पिता जीएल बतरा ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनका बेटा देश सेवा के लिए शहीद हुआ है। वह चाहते हैं कि उनके बेटे की बहादुरी को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए ताकि आने वाले पीढ़ी भी बतरा को जानें और उनमें भी देशसेवा का जज्बा पैदा हो। परमवीर चक्र विजेता बतरा रियल लाइफ के हीरो थे।
पाकिस्तानी आतंकी चोटी के टॉप पर थे और मशीन गन से उपर चढ़ रहे भारतीय सैनिकों पर गोलियां बरसा रहे थे। लेकिन बतरा ने हार नहीं मानी और एक के बाद एक पाकिस्तानी को ढेर करते हुए इस चोटी पर कब्जा कर लिया। बतरा खुद गंभीर रूप से घायल भी हुए लेकिन आखिरकार लंबी गोलीबारी के बाद इस पर अपना कब्जा कर लिया। 4875 प्वांइट पर कब्जे के दौरान भी बतरा ने बेहद बहादुरी दिखाई और इस परमवीर ने सैनिक को यह कहकर पीछे कर दिया कि तू बाल-बच्चेदार है, पीछे हट जा। खुद आगे आकर बतरा ने दुश्मनों की गोलियां खाई। उनके आखिरी शब्द थे 'जय माता दी'।